
SEBI ने एफएंडओ ट्रेडिंग के लिए लागू किए कड़े नियम, 1 अक्टूबर से होंगे प्रभावी
SEBI New F&O Rule: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फ्यूचर एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेडिंग के लिए सख्त नियमों की घोषणा की है, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू होंगे। नए नियमों का उद्देश्य अत्यधिक सट्टेबाजी को कम करना और जोखिम को कैश मार्केट गतिविधियों के साथ संरेखित करना है।
सेबी ने नए नियमों के तहत डेरिवेटिव ट्रेडिंग में पोजीशन लिमिट को कड़ा किया है। इसके अलावा, बैन में गए स्टॉक्स के लिए पोजीशन नियमों में संशोधन किया गया है और निगरानी बढ़ाई गई है।
नए नियम
- पोजीशन लिमिट में सख्ती: डेरिवेटिव ट्रेडिंग में पोजीशन लिमिट को कड़ा किया गया है। बैन में गए स्टॉक्स के लिए पोजीशन नियमों में संशोधन किया गया और मॉनिटरिंग बढ़ाई गई।
- मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट (एमडब्ल्यूपीएल): अब यह कैश वॉल्यूम और शेयर के फ्री फ्लोट से लिंक होगी। इसे फ्री फ्लोट के 15 प्रतिशत या एक्सचेंज में कैश वॉल्यूम के 65 गुना में से जो भी कम होगा, उसी के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
- तिमाही अपडेट: एमडब्ल्यूपीएल को रोलिंग कैश वॉल्यूम डेटा के आधार पर तिमाही रूप से अपडेट किया जाएगा।
- फ्यूचर इक्विवेलेंट ओपन इंटरेस्ट: बैन में प्रवेश के बाद दिन के अंत में फ्यूचर इक्विवेलेंट ओपन इंटरेस्ट में कमी आनी चाहिए। उदाहरण के लिए, पहले दिन के अंत में डेल्टा स्थिति (+10) या (-10) है, तो अगले दिन के अंत तक यह घटकर 0 रह सकती है।
- ऑफसेटिंग पोजीशन का नियम: किसी शेयर के लिए मार्केट ओपन इंटरेस्ट उसके एमडब्ल्यूपीएल के 95 प्रतिशत से अधिक होने पर ब्रोकर और ट्रेडर केवल ऑफसेटिंग पोजीशन के माध्यम से ही अपनी पोजीशन कम कर सकते हैं।
- इंट्राडे निगरानी: 3 नवंबर 2025 से एकल शेयरों के लिए एमडब्ल्यूपीएल की इंट्राडे निगरानी शुरू होगी। क्लियरिंग कॉर्पोरेशन कम से कम चार बार निगरानी करेगा और उल्लंघन होने पर एक्सचेंज अतिरिक्त निगरानी मार्जिन सहित कार्रवाई करेगा।
- प्री-ओपन सेशन का विस्तार: 6 दिसंबर 2025 से ट्रेडिंग सुविधा और तरलता प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए प्री-ओपन सेशन को एफएंडओ तक बढ़ा दिया जाएगा, जैसा कि नकद बाजार में होता है।
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नए नियमों का उद्देश्य
नए नियमों का उद्देश्य निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाना और बाजार में अनुचित सट्टेबाजी को रोकना है, जिससे डेरिवेटिव बाजार अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बन सके।
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