
BPSC पेपर लीक का ‘डॉक्टर’ गिरफ्तार! सीलबंद बॉक्स खोलकर उड़ाता था प्रश्नपत्र…
जांच में सामने आया है कि डॉ. मनीष पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) से वर्ष 2021 बैच का MBBS डॉक्टर है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने कैमूर के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सक के रूप में नौकरी भी की, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर पटना में रहकर NEET-PG की तैयारी करने लगा।
पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसकी नजदीकियां पेपर लीक गिरोह से बढ़ीं और वह धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का सक्रिय सदस्य बन गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि आर्थिक लाभ के लालच में उसने अपने मेडिकल पेशे से हटकर अपराध का रास्ता चुन लिया।
संजीव मुखिया के बेटे से करीबी संबंध
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. मनीष की घनिष्ठ मित्रता कथित पेपर लीक सरगना संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव से थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि डॉ. मनीष, डॉ. शिव और डॉ. शुभम ने मिलकर BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कराने की पूरी साजिश को अंजाम दिया।
इसी नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए और उनके लिए विशेष तैयारी कराई गई।
30 अभ्यर्थियों को हजारीबाग ले जाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, डॉ. मनीष ने परीक्षा से पहले लगभग 30 अभ्यर्थियों को पटना से झारखंड के हजारीबाग स्थित एक होटल में पहुंचाया था। आरोप है कि वहां उन्हें लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और संभावित उत्तर भी समझाए गए।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले ₹50,000 वसूले गए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस रकम का बंटवारा किन-किन लोगों के बीच हुआ और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।
सीलबंद बॉक्स खोलने में था माहिर
जांच अधिकारियों के मुताबिक, डॉ. मनीष की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्रश्नपत्रों से भरे सीलबंद ट्रंक या बॉक्स को बिना किसी स्पष्ट निशान के खोलना और फिर पहले जैसी स्थिति में दोबारा सील करना थी। इसी वजह से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले प्रश्नपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आसानी से पता नहीं चल पाता था।
पुलिस का मानना है कि यह तकनीक पूरे पेपर लीक रैकेट की सफलता का प्रमुख आधार थी और इसी कारण डॉ. मनीष गिरोह का भरोसेमंद सदस्य माना जाता था।
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296 गिरफ्तार, 15 मुख्य आरोपी अब भी फरार
BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस अब तक 296 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, इस मामले के 15 प्रमुख आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए बिहार सहित कई राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही है।
जांच एजेंसियां अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, तकनीकी मदद और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
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जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यही गिरोह अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सक्रिय था। इसके अलावा, नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।
डॉ. मनीष की गिरफ्तारी को इस बहुचर्चित पेपर लीक मामले में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उससे पूछताछ के बाद फरार आरोपियों और पूरे रैकेट के संचालन से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
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