
Operation Sindoor के वीरों को राष्ट्र की श्रद्धांजलि, 6 शहीदों के नाम हुए सार्वजनिक…
Operation Sindoor Martyrs: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं। इन वीर सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किए गए हैं, वहीं नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की 3D वॉल पर वर्ष 2025 के खंड में भी उन्हें स्थान दिया गया है।
यह कदम देश के उन बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके बलिदान को हमेशा के लिए राष्ट्रीय स्मृति में दर्ज करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पांच सैनिक और एक वायुसेना जवान ने दिया सर्वोच्च बलिदान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुल छह जवान शहीद हुए थे, जिनमें भारतीय सेना के पांच और भारतीय वायुसेना का एक जवान शामिल था। इन जवानों ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान के दौरान अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया।
उनके नामों को सार्वजनिक किए जाने के बाद देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। इस हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का फैसला लिया।
भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया।
नौ आतंकी ठिकानों पर हुए थे सटीक हमले
भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
सरकार के अनुसार, इन हमलों में सौ से अधिक आतंकवादी मारे गए थे और कई आतंकी ढांचे पूरी तरह नष्ट हो गए थे।
दुनिया ने देखा भारत का सख्त संदेश
ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का उदाहरण माना गया। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब निर्णायक और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा।
सैन्य विशेषज्ञों ने इसे आधुनिक तकनीक, सटीक खुफिया जानकारी और समन्वित सैन्य कार्रवाई का सफल उदाहरण बताया।
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DGMO वार्ता के बाद रुकी सैन्य कार्रवाई
ऑपरेशन के बाद दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच बातचीत हुई। 10 मई को हुई इस वार्ता के बाद भारत और पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई को रोकने पर सहमति जताई थी।
हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और भविष्य में भी किसी भी खतरे का जवाब पूरी मजबूती से दिया जाएगा।
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शहीदों का बलिदान हमेशा रहेगा अमर
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में शहीदों के नाम दर्ज किया जाना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र की ओर से उनके सर्वोच्च बलिदान को दिया गया सम्मान है।
देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इन वीर जवानों का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
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