
UIDAI लॉन्च करने जा रही है e-Aadhaar ऐप, स्मार्टफोन से आधार अपडेट होंगे आसान
Aadhaar Upgrade 2025: भारत में डिजिटल पहचान को और मजबूत बनाने के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) नवंबर 2025 में नया e-Aadhaar मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रही है। इस ऐप के जरिए यूजर्स नाम, पता, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर जैसी आधार संबंधी जानकारी सीधे अपने स्मार्टफोन से अपडेट कर सकेंगे।
UIDAI के CEO ने दी जानकारी
UIDAI के CEO भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि e-Aadhaar ऐप की टेस्टिंग और डेमो पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐप साल 2025 के अंत तक जनता के लिए उपलब्ध होगा। नए ऐप में आइडेंटिटी शेयरिंग फीचर भी शामिल होगा, जिसके तहत आधार डिटेल्स केवल कार्डधारक की अनुमति के बाद साझा की जा सकेंगी। इससे पहले लोग आधार की जानकारी शेयर करने के लिए फोटोकॉपी ले जाकर परेशानी झेलते थे।
e-Aadhaar ऐप की प्रमुख विशेषताएं
- डिजिटल अपडेट: यूजर्स नाम, पता, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर जैसे विवरण बिना आधार सेवा केंद्र जाए, ऐप से अपडेट कर सकेंगे।
- फेस रिकग्निशन ऑथेंटिकेशन: पासवर्ड या OTP की बजाय चेहरे की पहचान से लॉगिन और वेरिफिकेशन संभव होगा, जो फ्रॉड से सुरक्षा देगा।
- ऑटो-फेच डेटा: सरकारी डेटाबेस जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड और MGNREGA रिकॉर्ड से जानकारी अपने आप ऐप में आएगी, जिससे वेरिफिकेशन प्रक्रिया आसान होगी।
- बायोमेट्रिक अपडेट: फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जैसे बायोमेट्रिक अपडेट अभी भी आधार केंद्रों पर ही होंगे। नवंबर 2025 से ये केंद्र मुख्य रूप से बायोमेट्रिक अपडेट के लिए ही कार्य करेंगे।
यह भी पढ़ें…
मोरक्को से रक्षामंत्री का पाकिस्तान पर बड़ा बयान; ‘धर्म देखकर नहीं, हमने कर्म देखकर मारा’
मोबाइल नंबर अपडेट की प्रक्रिया
वर्तमान में मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए यूजर्स को आधार सेवा केंद्र जाना पड़ता है, जहां बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के साथ 50 रुपये शुल्क जमा कर अपॉइंटमेंट लेना होता है। नए e-Aadhaar ऐप के जरिए अधिकांश अपडेट डिजिटल हो जाएंगे, लेकिन मोबाइल नंबर बदलने के लिए यूजर्स को अब भी आधार केंद्र जाकर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कराना होगा।
यह भी पढ़ें…
साहस, संयम और संकल्प का पर्व जीवन में लाए नया विश्वास; पीएम मोदी ने दी नवरात्रि की बधाई
डिजिटल पहचान को और सुरक्षित बनाने का कदम
CEO भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि फेस रिकग्निशन और ऑटो-फेच डेटा जैसी तकनीकें उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाएंगी और डिजिटल आधार सेवाओं को और अधिक सरल और भरोसेमंद बनाएंगी।
यह भी पढ़ें…





