
दीपावली पर कांची कामाक्षी अम्मान मंदिर की अनोखी परंपरा… घर-घर जाकर मां देती हैं भक्तों को दर्शन
Kamakshi Amman Temple: देशभर में मंदिरों की अपनी अलग परंपरा और पौराणिक कथाएं हैं। लेकिन तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित कांची कामाक्षी अम्मान मंदिर दीपावली के दिन अपनी अनोखी छटा और विशेष परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
रोशनी, शंखनाद, फूलों की महक, नादस्वरम जैसे दक्षिण भारतीय साजों के स्वर के बीच मंत्रों का उच्चारण का माहौल देवलोक सा अहसास करवा रहा है। यह एकमात्र ऐसी शक्तिपीठ है जिसमें कामाक्षी मां की एक आंख में लक्ष्मी और दूसरी में सरस्वती का वास है।
दीपावली पर विशेष नियम
माना जाता है कि इस मंदिर में दीपावली के दिन हर कोई मां कामाक्षी के दर्शन नहीं कर सकता। जिन भक्तों के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हो, या दोनों में से किसी एक की मृत्यु हुई हो, उन्हें मंदिर में दर्शन करने की अनुमति नहीं होती। मृत्यु के एक साल बाद ही दर्शन की परंपरा निभाई जाती है।
इस दिन मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और मां को स्वर्ण गहनों से सुशोभित किया जाता है। दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ मां की आराधना की जाती है।
घर-घर जाकर मां देती हैं भक्तों को दर्शन
दीपावली के दिन मंदिर से मां कामाक्षी की पालकी यात्रा निकाली जाती है। भक्त अपने घरों से निकलकर बाहर खड़े होते हैं और मां के आशीर्वाद के लिए सिर झुकाते हैं। इस विशेष अवसर पर मां कामाक्षी की पूजा और दर्शन का अनुभव भक्तों के लिए अत्यंत पावन माना जाता है।
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अनोखा मंदिर और पौराणिक कथा
श्री कांची कामाक्षी अम्मान मंदिर शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जहां एक ही प्रतिमा में दो माताएं वास करती हैं। कहा जाता है कि कामाक्षी मां की एक आंख में लक्ष्मी और दूसरी में सरस्वती विराजमान हैं। भक्तों का मानना है कि मां अपने दोनों रूपों में दर्शन देती हैं।
मंदिर में सिर्फ सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है। भक्त माथे से लेकर चरणों तक सिंदूर अर्पित करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, मां लक्ष्मी को कुरूप होने का श्राप भगवान विष्णु ने दिया था, जिसे मां कामाक्षी ने अपने पवित्र रूप से दूर किया। इसके बाद मां लक्ष्मी भी कामाक्षी के साथ मंदिर में विराजमान हो गईं।
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बालिका रूप में मां कामाक्षी
मां कामाक्षी आठ साल की बालिका के रूप में मंदिर में विराजमान हैं। इस रूप में केवल विवाहित पंडित ही उनकी पूजा कर सकते हैं। इसे मां का अब तक का सबसे पवित्र रूप माना जाता है।
इस मंदिर की अनोखी परंपरा और दीपावली के दिन होने वाले विशेष उत्सव के कारण यह स्थल भक्तों और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है।
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