UP News: ऑक्सीजन बनी काल, हरदोई में एंबुलेंस स्टाफ की लापरवाही से मासूम की मौत!

UP News: हरदोई से लखनऊ रेफर किए गए 8 महीने के मासूम को एम्बुलेंस में तय सीमा से तीन गुना ज्यादा प्रेशर से ऑक्सीजन दे दी गई, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

UP News:  उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था और एम्बुलेंस कर्मियों की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक 8 महीने के बीमार मासूम बच्चे को राहत देने के बजाय एम्बुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) ने तय मानक से कहीं अधिक प्रेशर से ऑक्सीजन लगा दी। इसके कुछ ही देर बाद मासूम का पेट फूल गया और उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, कोतवाली क्षेत्र के गोधाई गांव के रहने वाले बब्बू के चार बच्चों में सबसे छोटा बेटा अरविंद (8 माह) बुधवार को अचानक दस्त और बुखार की चपेट में आ गया था। अरविंद की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे रात करीब 9 बजे मेडिकल कॉलेज के पीकू (PICU) वार्ड में लेकर पहुंचे। मासूम की गंभीर हालत को देखते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत लखनऊ रेफर कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस के ईएमटी (EMT) ने अरविंद को राहत देने के उद्देश्य से सीधे 6 लीटर प्रति मिनट के प्रेशर से ऑक्सीजन सपोर्ट पर डाल दिया। ऑक्सीजन का प्रेशर इतना अधिक था कि महज कुछ ही मिनटों में 8 महीने के मासूम बच्चे का पेट पूरी तरह से फूल गया और उसने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।

ये भी पढ़े- सोनम वांगचुक के आंदोलन में सपा की एंट्री! डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव ने दिया समर्थन…

क्या कहते हैं जिम्मेदार और डॉक्टर्स?

एम्बुलेंस सेवा 102 के प्रभारी नितिन कुमार का कहना है कि एम्बुलेंस में अधिकतम 6 लीटर प्रति मिनट के प्रेशर की ऑक्सीजन की व्यवस्था होती है। लेकिन आमतौर पर 8 महीने के बच्चे के लिए अधिकतम 2 लीटर प्रति मिनट के प्रेशर की ही ऑक्सीजन दी जाती है। यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी जांच की जा रही है।

पुलिस करा रही वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम

शहर कोतवाल संजय त्यागी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मासूम के शव को कब्जे में ले लिया है। डॉक्टरों के विशेष पैनल द्वारा और वीडियोग्राफी के बीच बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। हालांकि, शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की सटीक वजह साफ नहीं हो पाई है, जिसके कारण डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित (Viscera Preserved) रख लिया है। पुलिस का कहना है कि विसरा रिपोर्ट और अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ये भी पढ़े- 15 मौतों वाली इमारत को लेकर मालिक की गुहार, LDA से मांगी सील खोलने की इजाजत…

Back to top button