
‘हक चाहिए, वादा नहीं’… भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन; पुलिस से टकराव…
Bhopal Farmers Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। मूंग खरीदी, ई-टोकन प्रणाली में बदलाव और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सीएम हाउस की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें एमपी नगर क्षेत्र के पास वीर सावरकर सेतु पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
बैरिकेड तोड़ आगे बढ़ने की कोशिश
प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड हटाने का प्रयास किया। कुछ किसान बैरिकेड पार कर बसों पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
सड़क पर बनाई दाल-बाटी, किया सद्बुद्धि यज्ञ
आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इसके अलावा किसानों ने सरकार को “सद्बुद्धि” देने की कामना करते हुए यज्ञ भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसानों का कहना है कि मूंग की सरकारी खरीद समय पर नहीं हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि ई-टोकन प्रणाली में तकनीकी खामियों और अव्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं।
प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार से मांग की कि मूंग की खरीद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाए और सभी पात्र किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा अन्य कृषि संबंधी लंबित मांगों को भी जल्द पूरा करने की मांग की गई।
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सीएम हाउस की सुरक्षा बढ़ाई गई
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। सीएम हाउस जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेडिंग की गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर यातायात भी डायवर्ट किया।
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सरकार और प्रशासन की नजर
प्रशासन का कहना है कि किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है और उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है। वहीं किसान संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक सरकार लिखित रूप में ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल में किसानों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर कृषि नीतियों, सरकारी खरीद व्यवस्था और किसानों की समस्याओं को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।
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