‘आप माफ करने वाले होते कौन हैं?’ PM Modi की इंस्टाग्राम रील पर छिड़ी नई सियासी बहस…

PM Modi Instagram Post: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंस्टाग्राम रील को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो की अंतिम कड़ी में ‘माफी’ के विषय को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उसे लेकर आलोचकों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वीडियो में यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि माफी देने का अधिकार केवल सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति के पास है, जबकि लोकतंत्र में जनता की भूमिका और असहमति का भी अपना महत्व होता है।

आलोचकों के अनुसार, वीडियो के अंतिम यानी छठे एपिसोड में प्रधानमंत्री खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं जो विरोध करने वालों को माफ करने की स्थिति में हैं। उनका तर्क है कि इससे यह संदेश जाता है कि जनता को सत्ता के नजरिए को स्वीकार करना चाहिए और विरोध की गुंजाइश सीमित हो जाती है।

Instagram Reel को लेकर उठे सवाल
विश्लेषकों का कहना है कि यह वीडियो केवल विरोध करने वालों की भूमिका को कमतर नहीं दिखाता, बल्कि ऐसा माहौल भी तैयार करता है जिसमें सरकार के दृष्टिकोण को ही अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। आलोचकों ने इसे लोकतांत्रिक संवाद की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि असहमति को लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा माना जाना चाहिए।

‘मन की बात’ से भी की गई तुलना
प्रधानमंत्री के इस वीडियो की तुलना उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ से भी की जा रही है। कुछ टिप्पणीकारों का कहना है कि जिस तरह ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री अपनी बात जनता तक पहुंचाते हैं, उसी तरह सोशल मीडिया पर जारी यह रील भी एकतरफा संवाद का विस्तार प्रतीत होती है। उनका मानना है कि इसमें संवाद की बजाय सरकार का पक्ष अधिक प्रमुखता से सामने आता है।

31 जुलाई की रील में क्या कहा था?
31 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील साझा की थी। इस वीडियो में उन्होंने हाल के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन युवाओं को “गुमराह बच्चे” बताया था, जिन्होंने उनके और उनकी मां के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे ऐसे युवाओं को माफ करने की भावना रखते हैं और उनका मानना है कि उन्हें सही रास्ता दिखाने की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि आक्रोश और भटकाव की जगह संवाद और सकारात्मक सोच अपनाई जानी चाहिए।

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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और जनता का संबंध बराबरी का होता है, इसलिए विरोध करने वालों के प्रति इस तरह की भाषा और दृष्टिकोण पर बहस होना स्वाभाविक है।

वहीं, प्रधानमंत्री के समर्थकों का कहना है कि उनके बयान का उद्देश्य किसी को छोटा दिखाना नहीं, बल्कि युवाओं को हिंसा, अभद्र भाषा और टकराव की राजनीति से दूर रहने का संदेश देना था।

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बहस का केंद्र बना ‘माफी’ का मुद्दा
फिलहाल प्रधानमंत्री की इंस्टाग्राम रील और उसमें दिए गए “माफी” संबंधी संदेश को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। एक पक्ष इसे संवाद और सकारात्मक राजनीति का संदेश मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार के संदर्भ में देख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रह सकता है।

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