
Article 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की नई कहानी… जानिए 7 साल में क्या-क्या बदल गया
New Delhi News: 5 अगस्त 2019 भारतीय राजनीति और जम्मू-कश्मीर के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख मानी जाती है। इसी दिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया था।
अब इस फैसले के सात वर्ष पूरे हो चुके हैं। इन वर्षों में केंद्र सरकार ने सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, निवेश, पर्यटन, शिक्षा और आर्थिक विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव आने का दावा किया है। वहीं विपक्ष और कई राजनीतिक दल लोकतांत्रिक प्रक्रिया, राज्य का दर्जा बहाल करने और स्थानीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
आतंकवाद और कानून-व्यवस्था में बदलाव
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं, पत्थरबाजी और सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि पिछले सात वर्षों में आतंकी घटनाओं में लगभग 83 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग 99 प्रतिशत तक कम हुई हैं।
इसके अलावा नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में भी कमी आने की बात कही गई है। वर्ष 2025 में आतंकवादी घटनाओं में होने वाली मौतों का आंकड़ा पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर दर्ज होने का दावा किया गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा पर कड़ी निगरानी के कारण हालात पहले की तुलना में अधिक नियंत्रित हुए हैं।
रेल और सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया। रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों और पुलों जैसी परियोजनाओं में तेजी लाई गई। कई वर्षों से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने का काम तेज हुआ, जिससे कश्मीर घाटी की देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
सड़क नेटवर्क के विस्तार, नई सुरंगों और आधुनिक परिवहन सुविधाओं के कारण यात्रा का समय कम हुआ है। इससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि का दावा
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। घाटी के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। होटल उद्योग, स्थानीय कारोबार, हस्तशिल्प और परिवहन क्षेत्र को इससे लाभ मिला है। पर्यटन में बढ़ोतरी को सरकार क्षेत्र में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास का परिणाम बता रही है।
निवेश और रोजगार पर सरकार का फोकस
अनुच्छेद 370 हटने के बाद सरकार ने निजी निवेश आकर्षित करने के लिए नई औद्योगिक नीतियां लागू कीं। विभिन्न क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और उद्योगों के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
केंद्र सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्वरोजगार और कौशल विकास से जुड़ी कई योजनाओं को भी जम्मू-कश्मीर में तेजी से लागू करने की बात कही है।
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प्रति व्यक्ति आय और विकास के संकेतक
सरकार का दावा है कि बीते वर्षों में जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिला है। प्रति व्यक्ति आय, कर संग्रह, बैंकिंग गतिविधियों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे कई आर्थिक संकेतकों में वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क, बिजली, पेयजल और डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया गया है।
हालांकि, आर्थिक विकास के इन दावों के बीच बेरोजगारी, निजी निवेश की गति और स्थानीय उद्योगों की स्थिति जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञ अलग-अलग राय रखते हैं।
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राजनीतिक बहस अब भी जारी
जहां केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 हटाने को जम्मू-कश्मीर के विकास, राष्ट्रीय एकीकरण और स्थायी शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताती है, वहीं विपक्षी दल और कई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां राज्य का दर्जा बहाल करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करने तथा स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग लगातार उठाते रहे हैं।
विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के सात वर्ष बाद भी जम्मू-कश्मीर राजनीतिक और संवैधानिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। आने वाले समय में विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्र और स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।
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