देश की ‘अग्नि पुत्री’ डॉ. टेसी; मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया के नाम से भी मिली पहचान…

DRDO: भारत ने न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 की पहली सफल फ्लाइट टेस्टिंग की। 5000 किलोमीटर रेंज वाली इस मिसाइल की सफल टेस्टिंग के बाद पाकिस्तान ही नहीं चीन भी भारत की जद में आ गया है। DRDO के इस सफल मिशन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनमें से एक महिला वैज्ञानिक डॉ. टेसी थॉमस भी हैं।

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बता दें कि पिछले साल तक थॉमस इस प्रोजेक्ट को लीड कर रही थीं। उनकी ही अगुवाई में पहली बार साल 2012 में अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया गया था। उसके बाद से कई बार अग्नि 5 का परीक्षण किया गया है। हाल ही में DDRO ने अग्नि 5 की फ्लाइट टेस्टिंग की थी। जो सफल रही है। 

डॉ. टेसी का मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया बनने का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1984 में इसरो से बतौर इंटर्न की थी। उस वक्त उन्होंने सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल के डिजाइन पर काम किया था। शुरुआत से ही इनोवेटिव आइडिया पर काम करने वालीं डॉ. टेसी 1988 में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ( DRDO) के साथ जुड़ी और फिर उन्होंने डिफेंस के क्षेत्र में नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल पर काम करना शुरू किया। उसकी लगन और मेहनत को देखते हुए एपीजे अब्दुल कलाम ने अग्नि परियोजना के लिए नियुक्त किया था। जिसके बाद ही उन्हें मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया कहा जाने लगा।

डॉ टेसी थॉमस का बचपन काफी बुरे दौर से गुजरा था। जबे टेसी महज 13 साल की थीं तो उनके पिता लकवाग्रस्त हो गए थे। जिसके बाद उनके घर पर पैसों की कमी होने लगी लेकिन कभी भी उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया। उनकी मेहनत ही है कि भारत ने साल 2012 में पहली बार 5000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि 5 मिसाइल का सफल परीक्षण कर पाया था। डॉ टेसी थॉमस को बचपन से ही गणित पसंद था। स्कूल के दिनों में सबसे ज्यादा नंबर उनके गणित में ही आते थे। उन्होंने 1985 में कालीकट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उसके बाद उन्होंने पुणे के इंस्टीट्यूट ऑफ आर्मामेंट टेक्नोलॉजी (वर्तमान में डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी) से गाइडेड मिसाइलों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है। उन्होंने डीआरडीओ से पीएचडी भी की है।

डॉ. टेसी थॉमस को DRDO की तरफ से कई बार अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उसके बाद उन्हें अग्नि अवॉर्ड भी दिया गया। मिसाइल के क्षेत्र में भारत को आगे ले जाने के लिए उन्हें लाल बहादुर शास्त्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उसके बाद दो साल पहले साल 2022 में उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम आजाद के अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

अग्नि-5 भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक भूमि आधारित परमाणु सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 5000 से 7000 किलोमीटर के बीच है। ये मिसाइल एक तीन चरणों वाली, रोड-मोबाइल, कनस्तरीकृत, ठोस ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी एक यूनिट की कीमत 50 करोड़ रुपये आंकी गई है। अग्नि-5 मिसाइल की लंबाई 17.5 मीटर है, जबकि इसका व्यास लगभग 2 मीटर है. मिसाइल की रफ्तार 30,600 किलोमीटर/घंटा है।

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