
CM योगी ने मोहसिन रजा को बनाया अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष
UP अल्पसंख्यकआयोग का हुआ पुनर्गठन
मोहसिन को मिलेगा कैबिनेट मंत्री का दर्जा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पुनः अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया है। पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। मोहसिन रजा को कैबिनेट रैंक का दर्जा मिलेगा।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष का पद जून 2024 के बाद से खाली था। मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले रजा योगी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग में राज्य मंत्री रह चुके हैं।
मोहसिन रजा को आयोग की कमान सौंपे जाने की चर्चा के बीच राजनीतिक गलियारों में इसे भारतीय जनता पार्टी की अल्पसंख्यक नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। रजा लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ अल्पसंख्यक राजनीति का चेहरा रहे हैं।
अयोग के गठन को केवल प्रशासनिक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी सरकार की ओर से अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी पहुंच और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कवायद के रूप में इसे देखा जा रहा है। सरकार की ओर से आयोग के सात सदस्यों के नामों को लेकर नए सिरे से प्रस्ताव भेजा गया है।
2024 में खत्म हो गया था आयोग का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश सरकार ने जून 2021 में अशफाक सैफी को राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके साथ आयोग में सात सदस्यों की भी नियुक्ति हुई थी। 29 जून 2024 को अशफाक सैफी का कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद नियुक्त किए गए सदस्य परविंदर सिंह का कार्यकाल भी अगस्त 2024 में पूरा हो गया। इसके बाद आयोग में नई नियुक्तियां नहीं होने से लंबे समय तक पद खाली पड़े रहे। इसी को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के अधिकारियों से जवाब मांगा और आयोग के गठन को लेकर सख्त रुख अपनाया।

अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व
उत्तर प्रदेश सरकार की तैयारी आयोग में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की भी है। इसमें जैन, बौद्ध, सिख और पारसी समाज समेत अलग-अलग वर्गों को स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे आयोग के गठन को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक तौर पर यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। ऐसे समय में अल्पसंख्यक आयोग जैसे संवैधानिक निकाय में नियुक्तियां भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए सामाजिक समीकरण साधने और अल्पसंख्यक वर्गों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं।





