
NCRB Report 2023: दिल्ली में क्राइम के मामलों ने तोड़ा रिकॉर्ड, आंकड़े देखकर लगेगा डर
NCRB Report 2023: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट में दिल्ली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में देश में सबसे आगे रही. इसके अलावा अपहरण, चोरी और साइबर अपराधों में भी राजधानी में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
NCRB Report 2023: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2023 के अपराधों पर नई रिपोर्ट जारी कर दी है। इसमें बताया गया है कि 2023 में देशभर में 62.41 लाख से ज्यादा अपराध दर्ज किए गए हैं। इनमें से 37.63 लाख से ज्यादा मामले इंडियन पीनल कोड (IPC) के तहत दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 2022 में 58.24 लाख मामले दर्ज किए गए थे। यह दिखाता है कि 2022 की तुलना में 2023 में अपराध में 7% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
आजादी के बाद साल 1948 में जब भारत में क्राइम पर पहली रिपोर्ट जारी हुई थी, तब 6 लाख से ज्यादा अपराध दर्ज किए गए थे। अब 2023 में 62 लाख से ज्यादा अपराध दर्ज किए गए हैं। इसका मतलब हुआ कि आजादी से अब तक 75 सालों में अपराध 10 गुना से ज्यादा बढ़ गया है।
देश में लगातार बढ़ रहा क्राइम
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में आईपीसी अपराधों के तहत 3,24,257 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2022 में यह संख्या 3,00,429 थी. विशेष कानूनों और स्थानीय अधिनियमों के तहत भी मामले बढ़कर 20,006 हो गए, जो 2022 (19,845) और 2021 (14,485) से अधिक हैं. वहीं, इसी साल 506 हत्याएं हुईं, जिनमें 524 लोगों की जान चली गई. इसके अलावा 1,654 डकैती, 4,405 चोरी और 204 ब्लैकमेलिंग के मामले सामने आए. हिट-एंड-रन जैसी घटनाओं के 697 मामले दर्ज हुए, जिनमें 794 लोग प्रभावित हुए.
अपराध के मामले में दिल्ली टॉप पर
सबसे ज्यादाहत्याएं उत्तर प्रदेश में
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में कुल 62.41 लाख मामले दर्ज किए गए थे। सबसे ज्यादा 7.93 लाख मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए थे। इसके बाद महाराष्ट्र में 5.96 लाख, केरल में 5.84 लाख, गुजरात में 5.78 लाख, तमिलनाडु में 5.39 लाख और बिहार में 3.53 लाख मामले दर्ज किए गए थे। राजधानी दिल्ली में 3.44 लाख मामले सामने आए थे।
2023 में 28,587 हत्याओं में 27,721 मामले दर्ज किए गए थे। सबसे ज्यादा 3,307 हत्याएं उत्तर प्रदेश में हुई थीं। बिहार में 2,882 लोगों की हत्या हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 30 लाख से ज्यादा लोगों को IPC के तहत गिरफ्तार किया गया था। इनमें से 11.37 लाख को दोषी करार दिया गया था। वहीं 11.84 लाख को बरी कर दिया गया था। इसी तरह 21.25 लाख लोगों को विशेष कानूनों (SLL) के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 16.98 लाख को दोषी ठहराया गया था। SLL के तहत गिरफ्तार 4.60 लाख आरोपियों को बरी कर दिया गया था। कुल मिलाकर 51.28 लाख लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें से 28.36 को दोषी करार दिया गया था। गिरफ्तार होने वालों में लगभग 40 हजार नाबालिग थे।





