
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दिए कड़े निर्देश
Sonam Wangchuk को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को नियमित मेडिकल जांच कराने और जरूरत पड़ने पर तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया।
Sonam Wangchuk hunger strike: NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त टिप्पणी की और कहा कि देश के हर नागरिक की जान बेहद कीमती है और उसे बचाना सरकार का बुनियादी कर्तव्य है।
8 किलो से ज्यादा गिरा वजन
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनशन पर हैं। उनके इस आंदोलन को तीन हफ्ते होने वाले हैं, जिसके चलते उनका वजन 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का स्तर लगातार गिरने के कारण उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। वांगचुक की सेहत को ध्यान में रखते हुए वकील राकेश कुमार सैनी ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर उनके लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता की मांग की थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाकर लिक्विड डाइट के जरिए न्यूट्रिएंट्स दिए जाएं।
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हाई कोर्ट का आदेश
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस याचिका पर त्वरित सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम द्वारा सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना (डेली क्लिनिकल मॉनिटरिंग) जांच की जाए। कोर्ट ने साफ किया कि वांगचुक की स्थिति में सुधार के लिए जो भी जरूरी इलाज या मेडिकल हस्तक्षेप आवश्यक हो, उसे सरकार तुरंत सुनिश्चित करे।
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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्रशासन आंदोलनकारी की सेहत को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सरकारी डॉक्टरों की एक विशेष टीम पहले से ही उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है और डॉक्टरों के आकलन के आधार पर जब भी जरूरत होगी, उन्हें तुरंत आवश्यक दवाएं और चिकित्सा सहायता दी जाएगी।
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