
बिहार जीत के बाद यूपी में BJP का मिशन, प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट में बदलाव की तैयारी
Lucknow News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद भाजपा का मनोबल उत्तर प्रदेश में भी बढ़ गया है। बिहार में मिली सफलता के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब मिशन यूपी पर है। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने तैयारी तेज कर दी है।
प्रदेश अध्यक्ष पर मंथन
उत्तर प्रदेश में लंबे समय से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर मंथन कर रही है। पार्टी किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो जातीय समीकरण और संगठनात्मक संतुलन बनाए रख सके। चर्चा है कि ओबीसी समुदाय से किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस रेस में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और धर्मपाल सिंह के नाम आगे चल रहे हैं।
साथ ही दलित और ब्राह्मण समुदाय को संतुलित करने के लिए रामशंकर कठेरिया और सांसद दिनेश शर्मा का नाम भी चर्चा में है।
पंचायत चुनाव की रणनीति
भाजपा पंचायत चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देख रही है। पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव का असर विधानसभा चुनाव में भी दिखाई देगा। लोकसभा चुनाव में सपा से मिली हार के बाद अब पार्टी हर निर्णय रणनीतिक ढंग से ले रही है।
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SIR प्रक्रिया पर निगरानी
उत्तर प्रदेश में इस महीने से एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य में 22 साल बाद कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर पार्टी ने पूरी निगरानी रखी है। मंडल, विधानसभा क्षेत्र और प्रदेश स्तर पर अलग-अलग वार रूम बनाए गए हैं।
विपक्षी दल भी इस प्रक्रिया में सक्रिय हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चेतावनी दी है कि अगर एसआईआर में कोई गड़बड़ी हुई तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। सपा निगरानी के लिए पीडीए प्रहरी भी बनाएगी।
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कैबिनेट में बदलाव की संभावना
उत्तर प्रदेश में लंबे समय बाद कैबिनेट में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती के लिए कैबिनेट में नए चेहरे शामिल कर सकती है। बिहार चुनाव के चलते यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी रही, लेकिन अब इसे जल्द पूरा करने की तैयारी है। पिछले महीने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले पर विचार-विमर्श किया।
यह रणनीति और तैयारियाँ यह संकेत देती हैं कि भाजपा उत्तर प्रदेश में अगले चुनावों के लिए संगठनात्मक मजबूती और व्यापक राजनीतिक तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है।
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