
ED की रेड के बाद क्यों भड़कीं CM ममता बनर्जी? कोयला घोटाले से जुड़ा मामला
I-PAC Case: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी तेज होने के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई ने राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुलकर सामने आ गईं और इसे केंद्र सरकार की “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया।
सुबह की रेड, दोपहर तक सियासी बवाल
गुरुवार सुबह ईडी की टीम ने कोलकाता के साल्ट लेक सेक्टर-V स्थित I-PAC के दफ्तर समेत करीब 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। कुछ ही देर में यह खबर राजनीतिक हलकों में फैल गई। हालात तब और नाटकीय हो गए, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुरक्षा काफिले के साथ मौके पर पहुंचीं और अधिकारियों से सवाल-जवाब करने लगीं।
ED का दावा
ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के कथित कोयला तस्करी और अवैध खनन घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में हवाला और नकद लेनदेन से जुड़े कुछ अहम सुराग मिले हैं, जिनका संबंध प्रतीक जैन से जोड़ा जा रहा है।
यह केस मूल रूप से सीबीआई की 2020 की एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स इलाके में कोयला चोरी का आरोप लगाया गया था।
कौन हैं प्रतीक जैन?
- प्रतीक जैन देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हैं।
- IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई
- डेलॉइट में करियर की शुरुआत
- बाद में I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति और IT मैनेजमेंट में अहम भूमिका
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जीत के पीछे I-PAC की रणनीति को बड़ा कारण माना जाता है, जिससे प्रतीक जैन की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
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आगबबूला हुईं ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एजेंसी सिर्फ जांच नहीं, बल्कि टीएमसी की चुनावी रणनीति को निशाना बना रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी से जुड़े दस्तावेज, हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की जानकारी जब्त करने की कोशिश की गई। ममता ने सवाल उठाया—
“क्या चुनावी रणनीति और राजनीतिक दस्तावेजों की जांच ED का काम है?”
ईडी(ED) की सफाई
ईडी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तलाशी अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में है और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। एजेंसी का दावा है कि जिन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच हो रही है, वे कोयला घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन से संबंधित हैं।
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चुनाव से पहले बढ़ेगा टकराव
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई से केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज होगा। जहां टीएमसी इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है।
आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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