
शंकराचार्य पद पर सवाल से भड़के अविमुक्तेश्वरानंद… प्रशासन को 24 घंटे की चेतावनी
Prayagraj News: प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी और धार्मिक मर्यादा तक पहुंच गया है। द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है और उसे मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया है।
शंकराचार्य ने मेला प्रशासन को 24 घंटे के भीतर 8 पन्नों का विस्तृत जवाब ई-मेल के माध्यम से भेजा। इस नोटिस में उनसे यह सवाल किया गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित किया और किस अधिकार से धार्मिक आयोजनों को लेकर बयान दे रहे हैं।
यह धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप है: अविमुक्तेश्वरानंद
अपने जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शासन यह समझने की भूल कर रहा है कि शंकराचार्य की परंपरा सरकारी आदेश से चलती है। यह पूरी तरह धार्मिक और सनातन परंपरा से जुड़ा विषय है, जिसमें प्रशासन का कोई अधिकार नहीं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य की नियुक्ति शास्त्रसम्मत प्रक्रिया और मठ परंपरा के अनुसार होती है, न कि किसी सरकारी अनुमति से।
नोटिस वापस लेने की मांग
शंकराचार्य ने प्रशासन से नोटिस तुरंत वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हुए आगे का कदम उठाएंगे।
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मौनी अमावस्या स्नान से जुड़ा है विवाद
यह पूरा विवाद प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर स्नान व्यवस्था, श्रद्धालुओं की संख्या और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर दिए गए शंकराचार्य के बयानों के बाद शुरू हुआ। इसके बाद मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
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अहंकार में है शासन: अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने पत्र में कहा कि शासन अहंकार में आकर संतों और सनातन परंपराओं को चुनौती दे रहा है। यह न केवल अनुचित है, बल्कि समाज में अनावश्यक टकराव भी पैदा करेगा।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस जवाब पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह विवाद अब धार्मिक परंपरा बनाम प्रशासनिक अधिकार की बहस का रूप लेता दिख रहा है।
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