गणतंत्र दिवस पर कलाकारों का सम्मान… सीएम योगी बोले-‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत हमारी ताकत’

UP News: 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में प्रतिभाग करने वाले कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि अलग-अलग भाषाएं, कलाएं और परंपराएं होने के बावजूद भारत की आत्मा एक है और यही “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की मूल भावना है।

कलाकारों से संवाद, प्रस्तुतियों की सराहना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह के दौरान कलाकारों से संवाद किया और गणतंत्र दिवस समारोह में दी गई उनकी प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कलाकारों की प्रस्तुतियों में भारत की सांस्कृतिक विविधता, एकता और समरसता की झलक साफ दिखाई दी।

सीएम योगी ने कलाकारों को उत्तर प्रदेश भ्रमण का भी आमंत्रण दिया और कहा कि यह प्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत की भूमि है, जहां देश की विविध परंपराएं एक सूत्र में बंधी नजर आती हैं।

10 राज्यों के 261 कलाकार सम्मानित
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश समेत देश के 10 राज्यों से आए 18 कला समूहों के कुल 261 कलाकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर कलाकारों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। कलाकारों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणादायक है और इससे भारतीय लोक कला व संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी।

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“विविधता में एकता ही भारत की पहचान”
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता में एकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की लोक कलाएं, नृत्य, संगीत और परंपराएं मिलकर भारत को एक सांस्कृतिक महाशक्ति बनाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार लोक कलाकारों और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।

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कलाकारों ने जताया आभार
सम्मानित कलाकारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें अपनी कला को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। कलाकारों ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित यह सम्मान समारोह न केवल कलाकारों के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी सशक्त रूप से सामने लाया। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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