
योगी सरकार के प्रयासों से मिर्जापुर में वज्रपात से मौतों में 50% की कमी, बना रोल मॉडल
UP News: उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए योगी सरकार द्वारा अपनाई जा रही वैज्ञानिक, तकनीकी और जन-जागरूकता आधारित रणनीति अब जमीन पर ठोस नतीजे देने लगी है। मिर्जापुर में लागू किए गए ‘लाइटनिंग रेजिलिएंसी (Lightning Resilience) मॉडल’ के चलते जिले में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। सरकार का अगला लक्ष्य इस आंकड़े को शून्य पर लाना है।
सीएम योगी की स्पष्ट नीति: आपदा में भी जीरो टॉलरेंस
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) मिर्जापुर के अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के साथ ही यह स्पष्ट कर दिया था कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतें अब “नियति” नहीं बल्कि रोकने योग्य चुनौती हैं। इसी सोच के तहत उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) को अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग और जमीनी प्रशिक्षण के जरिए मजबूत किया गया।
क्यों था मिर्जापुर सबसे ज्यादा संवेदनशील
मिर्जापुर लंबे समय से देश के उन जिलों में शामिल रहा है जहां वज्रपात की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इसकी प्रमुख वजहें रही हैं—
- पथरीली और खनिज-समृद्ध जमीन
- व्यापक खनन गतिविधियां
- खुले खेत और वन क्षेत्र
- कच्चे मकानों और खुले जलस्रोतों के पास आबादी
इन कारणों से हर साल मानसून के दौरान बड़ी संख्या में जनहानि होती थी।
गहन अध्ययन से बना ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप’
समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए डीडीएमए मिर्जापुर ने बीते 4–5 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें—
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
- आईआईटीएम पुणे के वज्रपात स्थलीय डेटा
- आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के शोध
- सीआरओपीसी द्वारा संवेदनशीलता आकलन
को शामिल किया गया। इसके आधार पर जिले का लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप तैयार किया गया, जिससे यह साफ हुआ कि सबसे अधिक जोखिम किन इलाकों में है।
80 हाई-टेक लाइटनिंग अरेस्टर से सुरक्षित हुए संवेदनशील क्षेत्र
पहले चरण में हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन (ESE) आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए। ये उपकरण आकाशीय बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे आसपास जान-माल की क्षति नहीं होती।
कई अरेस्टरों के इंडिकेटर यह प्रमाणित कर चुके हैं कि उन्होंने कई बार बिजली को निष्क्रिय किया है।
तकनीक के साथ जागरूकता: दोहरी रणनीति
योगी सरकार की पहल सिर्फ मशीनों तक सीमित नहीं रही। समानांतर रूप से—
- ब्लॉक, जिला और ग्राम स्तर पर वज्रपात सुरक्षा प्रशिक्षण
- ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं और किसानों को क्या करें–क्या न करें की जानकारी
- ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप से समय से चेतावनी पाने का प्रशिक्षण
- स्कूलों, पंचायत भवनों और सामुदायिक स्थलों को अस्थायी सुरक्षित केंद्र के रूप में चिह्नित करना
जैसे कदम उठाए गए।
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809 ग्राम पंचायतों तक चला व्यापक जन-जागरूकता अभियान
जिले की सभी 809 ग्राम पंचायतों में—
- माइकिंग और जागरूकता रथ
- पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाएं
- सिनेमा हॉलों में बिजली से बचाव पर आधारित संदेश
- सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए IMD की चेतावनियां
लगातार प्रसारित की गईं।
ग्रामीणों और किसानों को मिला सबसे बड़ा लाभ
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण आबादी और किसानों को मिला है। अब समय पर चेतावनी मिलने से—
- किसान खेतों में काम के दौरान समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच पा रहे हैं।
- पशुधन की हानि में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
- गांवों में आपदा के प्रति सामूहिक सतर्कता विकसित हुई है।
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देश के लिए मॉडल बना मिर्जापुर
इन ठोस प्रयासों का नतीजा यह है कि मिर्जापुर में वज्रपात से मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही लाइटनिंग रेजिलिएंसी मॉडल अन्य संवेदनशील जिलों में लागू किया गया, तो उत्तर प्रदेश जल्द ही ऐसा राज्य बन सकता है जहां आकाशीय बिजली से जनहानि लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच जाए।
योगी सरकार की यह पहल आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई दिशा और राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रही है।
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