
गाय को ‘राज्यमाता’ बनाने की मांग पर सियासत गरम… मीट निर्यात रोकने की भी उठी आवाज
Avimukteshwaranand Statement: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाते हुए गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने और गोवंश/गोमांस निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
40 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो ‘गंभीर परिणाम’ की चेतावनी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सरकार को गोमाता की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा नहीं दिया गया और गोवंश निर्यात पर रोक नहीं लगी, तो इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं।
इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को गोहत्या पूरी तरह बंद कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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‘राष्ट्रमाता/राज्यमाता’ दर्जा और मीट निर्यात पर रोक की मांग
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार से दो प्रमुख मांगें रखी हैं—
- गाय को राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान का दर्जा देना
- गोमांस और गोवंश निर्यात को पूरी तरह बंद करना
उन्होंने यह भी कहा कि गौ संरक्षण सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा है, इसलिए सरकार को इस दिशा में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
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हालिया विवादों के बीच तेज हुई बयानबाजी
यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में प्रयागराज के धार्मिक कार्यक्रमों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनका सरकार से टकराव चर्चा में रहा है। इसके बाद उन्होंने सरकार और प्रशासन की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया की संभावना
ऐसे बयानों से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि गौ संरक्षण और मीट निर्यात दोनों ही संवेदनशील और बड़े आर्थिक-सामाजिक मुद्दे माने जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस पर कोई नीति बदलाव होता है, तो इसका असर कृषि, डेयरी, निर्यात और रोजगार जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
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