NCERT कंटेंट विवाद पर कोर्ट का कड़ा रुख, कहा– गलती करने वालों पर होगा एक्शन

CJI: सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा चैप्टर शामिल किए जाने के मामले में केंद्र सरकार और एनसीईआरटी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार की ओर से पेश माफी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि सिर्फ ‘सॉरी’ कह देने से काम नहीं चलेगा। अदालत ने पूछा कि यह सामग्री किसके निर्देश पर शामिल की गई और जिम्मेदार अधिकारियों के नाम बताए जाएं।

CJI की दो टूक: जवाबदेही तय होगी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि न्यायपालिका की छवि से जुड़ा यह गंभीर मामला है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किताबों में ऐसी सामग्री बिना पर्याप्त आधार और संवेदनशीलता के शामिल की गई है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा, “हमें नाम बताइए कि यह किसने किया। हम उचित कार्रवाई करेंगे।”

केंद्र की माफी से असंतुष्ट अदालत
सरकार की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि यह एक चूक थी और भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। लेकिन अदालत ने कहा कि केवल माफी से समस्या का समाधान नहीं होता। न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान से जुड़े मामलों में अधिक सावधानी अपेक्षित है।

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32 किताबें और दो किरदार विवाद में
सुनवाई के दौरान बताया गया कि विवादित सामग्री 32 किताबों में अलग-अलग रूपों में शामिल की गई थी। इसमें दो काल्पनिक पात्रों के जरिए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भ दिए गए थे, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।
कोर्ट ने पूछा कि क्या इस सामग्री की समीक्षा किसी विशेषज्ञ समिति से कराई गई थी या नहीं।

समीक्षा और सुधार के निर्देश
अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि सभी संबंधित किताबों की तुरंत समीक्षा की जाए और आवश्यक संशोधन किए जाएं। साथ ही भविष्य में पाठ्यपुस्तकों में संवेदनशील विषयों को शामिल करने से पहले विशेषज्ञों की राय लेने को कहा गया।

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अगली सुनवाई में रिपोर्ट तलब
भारत सरकार से कहा गया है कि वह अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों के नाम, प्रक्रिया और सुधारात्मक कदमों की जानकारी हो।

यह मामला शिक्षा सामग्री, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत सम्मान के बीच संतुलन पर एक बड़ी बहस के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के सख्त रुख से संकेत मिला है कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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