
UP में नई जल नीति… योगी आदित्यनाथ ने ‘री-यूज वाटर’ को दी मंजूरी
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लेते हुए ‘री-यूज वाटर’ (शोधित जल) के सुरक्षित पुनः उपयोग से जुड़ी नई नीति को मंजूरी दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी।
शोधित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के लिए नई नीति
नई नीति का मुख्य उद्देश्य घरों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को उपचारित कर उसे दोबारा उपयोग में लाना है, ताकि राज्य में बढ़ते पेयजल संकट को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्वच्छ पेयजल पर पड़ने वाला दबाव घटेगा और जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
ट्रीटेड पानी का गैर-पीने के कार्यों में होगा इस्तेमाल
इस योजना के तहत शोधित (ट्रीटेड) पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से गैर-पीने के कार्यों में किया जाएगा। इसमें औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य, सड़क की सफाई, बागवानी, कृषि सिंचाई और अन्य ऐसे उपयोग शामिल हैं, जहां पेयजल की आवश्यकता नहीं होती। इससे न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
संबंधित विभागों को निर्देश
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता और कार्यप्रणाली को और मजबूत किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक अपशिष्ट जल को सुरक्षित तरीके से शुद्ध किया जा सके। इसके साथ ही स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे शोधित जल के उपयोग को बढ़ावा दें और इसकी गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखें।
यह भी पढ़ें…
बेफिक्र होकर देशसेवा करें जवान… परिवार की सुरक्षा-सम्मान सरकार की जिम्मेदारी
कम होगी भूजल पर निर्भरता
इस नीति के लागू होने से शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन बेहतर होगा और उद्योगों को भी एक वैकल्पिक जल स्रोत मिलेगा, जिससे भूजल पर निर्भरता कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘सर्कुलर वाटर इकोनॉमी’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे संसाधनों का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें…
प्रयागराज में बड़ा हादसा: कोल्ड स्टोरेज ढहा, मलबे में दबे कई मजदूर, अमोनिया गैस से मचा हड़कंप
जन-आंदोलन के रूप में विकसित होगा Water Recycling
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक शहरों में इस मॉडल को लागू किया जाए और जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) को जन-आंदोलन के रूप में विकसित किया जाए। यह निर्णय बदलते पर्यावरण और बढ़ती आबादी के बीच जल संकट से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें…





