
BJP का ‘अंबेडकर कार्ड’… 2027 चुनाव से पहले लखनऊ में बनेगा भव्य स्मारक
UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने लखनऊ में नया अंबेडकर स्मारक बनाने की पहल की है, जिसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से अहम कदम माना जा रहा है।
लखनऊ में बीते करीब 20 सालों बाद अब दूसरी बार बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की याद में बड़ा स्मारक बनने वाला है। पहली बार यह स्मारक मायावती की सरकार के समय गोमती नगर में बनाया गया था, जबकि अब योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ये बीड़ा उठाया है।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
लखनऊ के ऐशबाग इलाके में “भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल और कल्चरल सेंटर” बनाया जा रहा है। यह स्मारक भीमराव अंबेडकर की विचारधारा, उनके संघर्ष और संविधान निर्माण में उनके योगदान को समर्पित होगा।
- क्षेत्रफल: लगभग 5,500 वर्ग मीटर
- स्थान: ईदगाह के सामने, ऐशबाग, लखनऊ
- शिलान्यास: 2022 में राम नाथ कोविंद द्वारा
- प्रारंभिक लागत: ₹45 करोड़
- संशोधित लागत: ₹100 करोड़+ (ऑडिटोरियम, लैंडस्केपिंग, अन्य सुविधाओं के कारण)
पहले भी बना था बड़ा स्मारक
इससे पहले मायावती की सरकार के दौरान गोमती नगर में भव्य अंबेडकर स्मारक बनाया गया था, जो दलित राजनीति का प्रतीक माना जाता है। अब करीब 20 साल बाद दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक नया संकेत दे रहा है।
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सिर्फ स्मारक नहीं, एक ‘थिंक स्पेस’
सरकार का दावा है कि यह केवल एक मूर्ति या पार्क नहीं होगा, बल्कि:
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ऑडिटोरियम
- रिसर्च और अध्ययन के लिए स्पेस
- अंबेडकर के विचारों पर प्रदर्शनी
यानी इसे एक “लिविंग मेमोरियल” के रूप में विकसित किया जाएगा।
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राजनीतिक संदेश क्या है?
2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को यूपी में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, और विश्लेषकों ने इसे दलित वोटों के एक हद तक विपक्ष की ओर झुकाव से जोड़ा। ऐसे में:
- यह प्रोजेक्ट दलित समुदाय को संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है
- बीजेपी अंबेडकर की विरासत से जुड़ाव दिखाकर सामाजिक संतुलन साधना चाहती है
- विपक्ष इसे “चुनावी रणनीति” बता रहा है
अंबेडकर स्मारक का यह नया प्रोजेक्ट सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर जमीन पर कितना दिखाई देता है।
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