
एनकाउंटर या साजिश? भरत तिवारी की बहनों के दावों से गरमाई राजनीति…
Bharat Tiwari Encounter Case: चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। मृतक भरत तिवारी की बहनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उनके भाई को तीन नहीं, बल्कि पांच गोलियां लगी थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि भरत को जहरीला इंजेक्शन दिया गया हो सकता है। परिवार के इन आरोपों के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मामले को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को डराने और दबाने की कोशिश बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
बहनों का दावा- तीन नहीं, पांच गोलियां लगी थीं
भरत तिवारी की मौत के बाद परिवार सदमे में है। उनकी दोनों बहनों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी में तीन गोलियां लगने की बात सामने आई थी।
हालांकि, जब पटना के अस्पताल में उन्होंने शव को देखा तो उन्हें पांच गोली के निशान दिखाई दिए। बहनों का कहना है कि यह तथ्य पूरे मामले को संदेहास्पद बनाता है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
परिवार का आरोप है कि अब तक सामने आई जानकारी और शव पर मिले निशानों में अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जहरीले इंजेक्शन की आशंका भी जताई
मृतक की बहनों ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने भरत का शव देखा तो उसके मुंह से झाग निकल रहा था। इसी आधार पर उन्होंने आशंका जताई कि संभवतः उसे कोई जहरीला इंजेक्शन दिया गया हो।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट या जांच एजेंसी की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही चल सकेगा।
परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
भरत तिवारी के परिजनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
परिवार का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं और जब तक विस्तृत जांच नहीं होती, तब तक मौत की परिस्थितियों को लेकर संदेह बना रहेगा।
JMM ने साधा सरकार पर निशाना
मामले को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने भ्रष्टाचार या अन्य अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी, तो उसकी मौत की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
JMM ने आरोप लगाया कि यह घटना उन लोगों के लिए एक संदेश की तरह दिखाई देती है जो सत्ता या व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हैं। पार्टी ने पूरे मामले की न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
भरत तिवारी
ने
भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया।
अराजकता पर सवाल उठाया।
सत्ता के संरक्षण में पल रहे अपराध पर सवाल उठाया।
भाजपा के पास जवाब नहीं था।
जब जवाब नहीं बचा, तो सत्ता की ताकत दिखाई गई।
57 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक आवाज़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।
याद रखिए,…
— Jharkhand Mukti Morcha (@JmmJharkhand) June 20, 2026
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राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
भरत तिवारी मामले में परिवार के नए आरोपों और JMM की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो यह मामला और अधिक संवेदनशील बन सकता है।
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजरें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यही रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि भरत तिवारी को कितनी गोलियां लगीं, मौत का वास्तविक कारण क्या था और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
परिवार, राजनीतिक दलों और आम लोगों की मांग है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो ताकि किसी भी तरह की आशंका और विवाद को खत्म किया जा सके।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
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