दलितों को साधने की रणनीति? यूपी में BJP का ‘आंबेडकरमय’ मिशन

Ambedkar Jayanti in UP: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने डॉ. B. R. Ambedkar की जयंती को इस बार भव्य और व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी कर ली है। पार्टी का लक्ष्य पूरे प्रदेश को ‘आंबेडकरमय’ बनाना है, जिसके तहत सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

हर विधानसभा क्षेत्र में होंगे आयोजन
पार्टी की योजना के मुताबिक, प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर संगोष्ठियों, प्रतिमा अनावरण और सेवा कार्यों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के जरिए दलित समाज के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह आयोजन सामाजिक समरसता के साथ-साथ सियासी संदेश देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीएम योगी भी होंगे शामिल
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी आंबेडकर महासभा के कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके अलावा, पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रविवार से ही शुरू हो गए कार्यक्रम
हालांकि आंबेडकर जयंती मंगलवार को है, लेकिन प्रदेश में कार्यक्रमों की शुरुआत रविवार से ही हो चुकी है। इससे पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और पार्टी कार्यकर्ता सक्रिय नजर आ रहे हैं।

दीपांजलि और प्रतिमा अनावरण जैसे विशेष आयोजन
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा बछरावां (रायबरेली) और लखनऊ में विशेष कार्यक्रमों में भाग लेने की योजना है।

केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर रायबरेली के बछरावां क्षेत्र में बाबा साहेब की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद लखनऊ के हजरतगंज में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर 11,000 दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

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मूर्ति विकास योजना को मिली मंजूरी
हाल ही में राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में आंबेडकर समेत अन्य दलित महापुरुषों और महिलाओं की मूर्तियों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

यह कदम सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर व्यापक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।

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सियासी और सामाजिक संदेश का संगम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अभियान सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दलित समाज के साथ जुड़ाव को मजबूत करने और सामाजिक समरसता का संदेश देने की भी कोशिश की जा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस व्यापक अभियान का राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।

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