
TCS Nashik Case: यौन शोषण से धार्मिक दबाव तक—HR पर उठे गंभीर आरोप
TCS Nashik Dispute: नासिक के TCS BPO में पुलिस ने एक महीने तक हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर यौन उत्पीड़न और अन्य शिकायतों की जांच की। इस गुप्त ऑपरेशन से 9 FIR और 7 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें HR मैनेजर निदा खान भी शामिल हैं।
TCS Nashik Dispute: देश की दिग्गज आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। महाराष्ट्र के नाशिक स्थित इसके ऑफिस से जुड़े मामले ने कॉर्पोरेट जगत को झकझोर दिया है। इस केस में यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस के साथ-साथ कंपनी भी आंतरिक स्तर पर कार्रवाई कर रही है। हालांकि, अब तक सामने आए तथ्यों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर कार्यस्थल की सुरक्षा और शिकायत प्रणाली को लेकर।
कैसे शुरू हुआ मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत 2026 की शुरुआत में एक कर्मचारी की शिकायत से हुई। शुरुआती जांच में मामला गंभीर प्रतीत होने पर पुलिस ने गुप्त जांच (अंडरकवर ऑपरेशन) शुरू किया। बताया जा रहा है कि महिला पुलिसकर्मियों को कंपनी में हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया, ताकि अंदर की स्थिति को समझा जा सके। इसी दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर केस ने बड़ा रूप ले लिया।
जबरन नमाज पढ़ने और धर्म परिवर्तन का दबाव
शिकायतकर्ताओं ने बार-बार गलत तरीके से छूने, अश्लील टिप्पणियां करने, छेड़छाड़ करने और कुछ मामलों में शादी के झूठे वादे करके शारीरिक संबंध बनाने के आरोप लगाए हैं। पीड़ितों ने यह भी बताया कि उन पर धर्म परिवर्तन करने, नमाज पढ़ने और मुस्लिम धर्म के आयोजनों में शामिल होने का दबाव डाला गया। कुछ ने तो यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने की कोशिशें की गईं।
“टारगेटिंग सिस्टम” का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि, नए और कमजोर स्थिति वाले कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था। कथित तौर पर WhatsApp ग्रुप्स में “टारगेट” तय किए जाते थे। अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक संगठित शोषण तंत्र की ओर इशारा करता है।
HR निदा खान की भूमिका पर सवाल
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल कंपनी के HR विभाग पर उठे हैं। आरोप है कि, कई शिकायतों को दबा दिया गयापीड़ितों को आगे शिकायत करने से रोका गया. करीब 70 से ज्यादा ईमेल और शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
जांच के दौरान यह पता चला कि एचआर हेड निदा खान खुद इस खौफनाक साजिश में शामिल थी। उससे बार-बार शिकायतें की गईं लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया। निदा खान का बयान 10 अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया था।
पुलिस और SIT की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है।अब तक कई FIR दर्ज की जा चुकी हैं। कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और डिजिटल सबूत (ईमेल, चैट, कॉल रिकॉर्ड) खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह से साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
TCS की प्रतिक्रिया
Tata Consultancy Services ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड किया है और आंतरिक जांच शुरू की है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर काम करती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्यों बड़ा है यह मामला?
यह विवाद सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। इसके व्यापक असर हैं
- भारत की सबसे प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों में से एक का नाम जुड़ा है
- लंबे समय तक शिकायतों के अनसुना रहने के आरोप हैं
- कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं
- POSH (Prevention of Sexual Harassment) व्यवस्था की प्रभावशीलता पर बहस तेज हुई है
अभी क्या स्थिति है?
यह मामला अभी जांच के अधीन है।अदालत में आरोप साबित होना बाकी है, इसलिए सभी तथ्यों को अंतिम नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना तय है कि इस केस ने कॉर्पोरेट सेक्टर में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और चल रही जांच के आधार पर तैयार की गई है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।)





