किन्नरों के ‘नेग’ पर हाईकोर्ट का अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला

लखनऊ/प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किन्नर समुदाय को लोगों से ‘नेग’ या ‘बधाई’ मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि परंपरा के नाम पर किसी को पैसे देने के लिए मजबूर करना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जबरन वसूली (Extortion) की श्रेणी में आता है और यह एक दंडनीय अपराध है।
क्या था पूरा मामला?
यह फैसला न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने गोंडा जिले की एक ट्रांसजेंडर रेखा देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें ‘नेग’ वसूलने के लिए एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र आवंटित किया जाए और इस कार्य के दौरान उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी:
अदालत ने याचिका को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ किन्नरों के कल्याण की बात तो करता है, लेकिन यह उन्हें जबरन पैसा वसूलने का लाइसेंस नहीं देता। कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी नागरिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध पैसे देने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। अगर कोई किन्नर डरा-धमकाकर या रास्ता रोककर पैसे मांगता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।
आम जनता के लिए राहत:
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद घरों और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली अभद्रता और जबरन वसूली पर लगाम लगेगी। अब पीड़ित व्यक्ति सीधे पुलिस की मदद ले सकेंगे।
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