Hormuz में अमेरिका का ऑपरेशन फेल? सऊदी एयरस्पेस न मिलने से बढ़ी मुश्किलें

Iran US War Ceasefire Situation: मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को होर्मुज स्ट्रेट में चलाया जा रहा जहाज रेस्क्यू मिशन रोकना पड़ा।

क्या था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
अमेरिका ने 4 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से ऑपरेशन शुरू किया था। इस मिशन का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को खुला रखना था।

लेकिन ऑपरेशन शुरू होने के महज एक दिन बाद ही ट्रम्प प्रशासन ने इसे रोकने का आदेश दे दिया। उस समय ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तान के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है। हालांकि अब सामने आ रही रिपोर्ट्स इस फैसले की एक अलग कहानी बता रही हैं।

NBC रिपोर्ट में बड़ा दावा
अमेरिकी मीडिया संस्थान NBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब इस मिशन के तरीके से खुश नहीं था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने अचानक सोशल मीडिया के जरिए ऑपरेशन का ऐलान कर दिया, जिससे खाड़ी देशों की सरकारें चौंक गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक Mohammed bin Salman समेत सऊदी नेतृत्व इस फैसले से नाराज हो गया। इसके बाद अमेरिका ने मिशन में शामिल विमानों के लिए सऊदी एयरस्पेस और एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति मांगी, लेकिन रियाद ने इसे मंजूरी नहीं दी।

ट्रम्प और MBS के बीच हुई बातचीत
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प ने खुद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की थी। लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

सऊदी अरब के रुख के बाद अमेरिका के लिए ऑपरेशन को जारी रखना मुश्किल हो गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस मिशन के तहत दो दिनों में केवल तीन जहाजों को ही सुरक्षित रास्ता दिला पाया था।

आखिर क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।

हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ी हुई है। अमेरिका लंबे समय से इस मार्ग में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है।

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खाड़ी देशों में बढ़ी बेचैनी
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देश नहीं चाहते कि क्षेत्र में तनाव और बढ़े। यही वजह है कि सऊदी अरब जैसे देश किसी बड़े सैन्य अभियान से दूरी बनाकर चल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प के अचानक लिए गए फैसले से अमेरिका के सहयोगी देश असहज हो गए थे। उन्हें डर था कि इससे क्षेत्र में टकराव बढ़ सकता है और ईरान के साथ स्थिति और खराब हो सकती है।

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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल
इस घटनाक्रम ने अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय से दोनों देशों को रणनीतिक सहयोगी माना जाता रहा है, लेकिन इस मामले में सऊदी अरब के रुख ने संकेत दिया है कि खाड़ी देश अब हर अमेरिकी सैन्य रणनीति के साथ बिना शर्त खड़े होने के पक्ष में नहीं हैं।

फिलहाल ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ बंद हो चुका है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और कूटनीतिक हलचल अभी भी जारी है।

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