
कोर्ट में वकील की भूमिका में दिखीं ममता बनर्जी, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप..
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने गुरुवार को Calcutta High Court में वकील के रूप में अपनी पहली औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई हिंसा से जुड़े मामले में उन्होंने खुद अदालत में पैरवी करते हुए पीड़ितों की सुरक्षा की मांग की और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
काले कोट और वकीलों के गाउन में कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी को देखने के लिए अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य के कई हिस्सों में व्यापक हिंसा हुई, जिसमें महिलाओं, बच्चियों और बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा गया।
कोर्ट में पेश की 10 मृतकों की सूची
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अदालत को दस मृतकों की सूची सौंपी। उन्होंने दावा किया कि इन मृतकों में छह हिंदू समुदाय से जुड़े थे। ममता ने कहा कि हिंसा केवल राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने अदालत को बताया कि कई इलाकों में लोगों के घरों, दुकानों और कार्यालयों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। उनका आरोप था कि पुलिस की मौजूदगी में यह सब होता रहा, लेकिन कई मामलों में FIR तक दर्ज नहीं की गई।
‘92 वर्षीय विधवा को घर से निकाला गया’
ममता बनर्जी ने सुनवाई के दौरान एक 92 वर्षीय अनुसूचित जाति की विधवा महिला का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि महिला और उसके परिवार को कथित रूप से उनके घर से बाहर निकाल दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने अदालत से मांग की कि हिंसा प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाए और जिन मामलों में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, उनकी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
पुलिस प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी दलीलों में कहा कि कई पीड़ित परिवार डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक मशीनरी समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही। ममता ने कहा कि अगर पुलिस निष्पक्ष तरीके से काम करती, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की।
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कोर्ट परिसर के बाहर लगे नारे
सुनवाई के बाद जब ममता बनर्जी अदालत परिसर से बाहर निकलीं, तब कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। “चोर-चोर” के नारों के बीच सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वहां से बाहर निकाला। इस दौरान कोर्ट परिसर के बाहर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल भी देखने को मिला।
हालांकि ममता बनर्जी ने मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की और सीधे वहां से रवाना हो गईं। लेकिन उनकी यह अदालत में मौजूदगी राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गई।
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राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री का खुद अदालत में पैरवी करना राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ममता बनर्जी की ओर से एक मजबूत राजनीतिक और कानूनी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा का मुद्दा पहले से ही राज्य की राजनीति में गर्माया हुआ है। अब अदालत में ममता बनर्जी की सक्रिय भागीदारी के बाद इस मामले ने और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।
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