
Strait of Hormuz पर संकट गहराया, दुनिया पर मंडरा रहा तेल संकट…
Global Energy Crisis: Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और कथित नाकेबंदी की आशंकाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है और तेल आपूर्ति लगातार प्रभावित होती रही, तो दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित करती है।
तेजी से घट रहे ऑयल रिजर्व
रिपोर्ट्स के अनुसार कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।
अगर सप्लाई लंबे समय तक बाधित रही तो ये रिजर्व तेजी से कम हो सकते हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खपत और सीमित आपूर्ति की स्थिति में तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं।
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
- पेट्रोल-डीजल होंगे महंगे
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ेगा। इससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। - महंगाई बढ़ने का खतरा
परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक की कीमतों में उछाल आ सकता है। - उद्योगों पर असर
ऊर्जा आधारित उद्योगों, एयरलाइंस और शिपिंग सेक्टर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। - आर्थिक मंदी की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबा ऊर्जा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है।
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क्या दुनिया के पास विकल्प हैं?
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि कई देश वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, गैस और परमाणु ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी दुनिया काफी हद तक तेल पर निर्भर है।
अमेरिका और कुछ अन्य देशों के पास रणनीतिक तेल भंडार जरूर हैं, लेकिन लंबे समय तक वैश्विक सप्लाई बाधित रहने पर यह भी पर्याप्त नहीं साबित हो सकते।
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बाजारों में बढ़ी बेचैनी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पश्चिम एशिया में तनाव कब कम होगा और तेल सप्लाई सामान्य हो पाएगी।
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर युद्ध जल्द नहीं रुका तो दुनिया को आने वाले महीनों में गंभीर ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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