बंगाल में TMC में बगावत के संकेत, निकाले गए नेता ने किया 50 विधायकों का दावा

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) के भीतर टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी से निकाले गए नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के 50 से ज्यादा विधायक उनके संपर्क में हैं और वे खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने की तैयारी कर रहे हैं।

रिजू दत्ता के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। हालांकि उनके दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

स्पीकर के सामने रखेंगे तीन बड़ी मांगें
रिजू दत्ता ने दावा किया कि उनके समर्थन वाले विधायक विधानसभा स्पीकर से मिलकर तीन प्रमुख मांगें रखेंगे।

पहली मांग यह होगी कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है और 50 से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं, इसलिए उन्हें ही असली तृणमूल कांग्रेस माना जाए।

दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि विधानसभा में नेता विपक्ष का पद ऋतब्रत को दिया जाए, न कि शोभनदेव को।

तीसरी और सबसे अहम मांग पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर है। रिजू दत्ता का कहना है कि यदि उनके पास पर्याप्त विधायक हैं, तो पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिन्ह भी उनके गुट को मिलना चाहिए।

दो-तिहाई बहुमत का गणित क्या कहता है?
All India Trinamool Congress के पास बंगाल विधानसभा में कुल 80 विधायक हैं। किसी नए गुट को आधिकारिक मान्यता पाने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 54 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 54 से कम विधायक किसी गुट के साथ होते हैं, तो विधानसभा स्पीकर उन्हें अलग दल के रूप में मान्यता नहीं देंगे। यही वजह है कि रिजू दत्ता के 50 विधायकों वाले दावे पर कई सवाल उठ रहे हैं।

खुद विधायक नहीं हैं रिजू दत्ता
इस पूरे घटनाक्रम की एक बड़ी बात यह भी है कि टूट का दावा करने वाले रिजू दत्ता खुद विधायक नहीं हैं। ऐसे में उनके दावों को लेकर राजनीतिक हलकों में संदेह भी जताया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है।

ममता बनर्जी के लिए बढ़ सकती है चुनौती
Mamata Banerjee लंबे समय से बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

यदि रिजू दत्ता के दावे में सच्चाई निकलती है, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। हालांकि फिलहाल आंकड़ों के लिहाज से उनके दावे अधूरे दिखाई दे रहे हैं।

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चुनाव चिन्ह पर भी हो सकता है विवाद
राजनीतिक दलों में टूट की स्थिति में चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद अक्सर चुनाव आयोग तक पहुंचता है। यदि किसी गुट के पास पर्याप्त समर्थन साबित हो जाता है, तो वह पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति तक पहुंचने के लिए रिजू दत्ता गुट को पहले विधायकों का स्पष्ट समर्थन सार्वजनिक रूप से दिखाना होगा।

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बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद West Bengal की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है या वास्तव में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा विभाजन होने जा रहा है।

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