
कुशीनगर में अवैध अस्पतालों का नेटवर्क, कप्तानगंज समेत कई इलाकों में जारी खेल; सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
UP News: कुशीनगर जिले में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों का कारोबार अब भी धड़ल्ले से जारी है। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन नेताओं और रसूखदारों के संरक्षण में कई अस्पताल वर्षों से बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में न तो पंजीकृत डॉक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ, फिर भी मरीजों का इलाज और ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं।
तमकुहीराज में छापेमारी, हॉस्पिटल का ओटी सील
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तमकुहीराज क्षेत्र में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान लखीबाग स्थित लाइफ लाइन हॉस्पिटल में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
अस्पताल प्रबंधन पंजीकरण संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। निरीक्षण के समय बिना वैध अनुमति के तीन ऑपरेशन मरीज भर्ती पाए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) और चिकित्सक कक्ष को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
दो अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण के दौरान टीम ने नेशनल हाईवे स्थित ॐ साई हॉस्पिटल और अभिराज हॉस्पिटल का भी निरीक्षण किया।
जांच में दोनों अस्पतालों में साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड और अभिलेखों के रखरखाव में भी गंभीर खामियां पाई गईं। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जल्द सुधार के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
लंबित रहे आवेदन, अवैध अस्पतालों को मिला मौका
जानकारी के अनुसार पिछले एक वर्ष में जिले में निजी अस्पतालों के पंजीकरण के लिए लगभग 600 आवेदन प्राप्त हुए थे। लेकिन स्थलीय सत्यापन में देरी के कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रहे।
इसी स्थिति का फायदा उठाकर कई संचालकों ने केवल पोर्टल पर आवेदन करने के आधार पर बिना अनुमति अस्पतालों का संचालन शुरू कर दिया। इनमें से कई संस्थानों ने आवश्यक मानकों को पूरा किए बिना मरीजों का इलाज और ऑपरेशन तक किए।
डीएम की नाराजगी के बाद कार्रवाई
हाल ही में जिला स्वास्थ्य समिति (DHS) की बैठक में जिलाधिकारी ने लंबित आवेदनों और अवैध अस्पतालों के संचालन पर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने लंबित मामलों का निस्तारण तेज किया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
- 267 आवेदन निरस्त किए गए।
- 140 अस्पतालों का पंजीकरण किया गया।
- 123 अस्पतालों का स्थलीय सत्यापन शुरू किया गया।
हालांकि अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निरस्त किए गए अस्पतालों का संचालन पूरी तरह बंद कराना है।
कप्तानगंज समेत कई क्षेत्रों में अब भी सक्रिय अवैध अस्पताल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तमकुहीराज में हुई कार्रवाई के बावजूद कप्तानगंज, पडरौना, रामकोला और अन्य इलाकों में कई अस्पताल बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में न तो योग्य चिकित्सक मौजूद हैं और न ही आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं।
लोगों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आखिर क्यों फल-फूल रहे हैं अवैध अस्पताल?
जांच और पूर्व मामलों में सामने आए तथ्यों से कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं।
प्रमुख अनियमितताएं:
- एक ही डॉक्टर की डिग्री का कई अस्पतालों में इस्तेमाल।
- बिना पंजीकरण ऑपरेशन और प्रसव कराना।
- प्रशिक्षित स्टाफ की कमी।
- मरीजों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों का उचित रखरखाव न होना।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा वैध अस्पतालों की सूची सार्वजनिक न करना।
तीन बड़े मामलों ने खोली थी पोल
1. गीतांजलि हॉस्पिटल: प्रसूता की मौत के बाद फर्जी डिग्री का खुलासा
रामकोला क्षेत्र स्थित गीतांजलि हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई थी। जांच में अस्पताल संचालिका डॉ. मीरा शर्मा की मेडिकल डिग्री फर्जी पाई गई। मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी सहित कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
2. कुशवाहा हेल्थ केयर: ऑपरेशन करते पकड़ा गया झोलाछाप
सिधुआ स्थित कुशवाहा हेल्थ केयर हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान एक झोलाछाप को पित्त की थैली का ऑपरेशन करते हुए पकड़ा था। हालांकि संचालक और आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
3. हिंद हॉस्पिटल: प्रसव के बाद महिला की मौत
पडरौना के खिरिया टोला स्थित हिंद हॉस्पिटल में प्रसव के बाद 24 वर्षीय पूजा कुशवाहा की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होने पर अस्पताल सील कर दिया गया और संचालक सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
अब सार्वजनिक होगी पंजीकृत अस्पतालों की सूची
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी पंजीकृत अस्पतालों की सूची सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को भेज दी गई है। इसे सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कराया जाएगा ताकि लोग वैध और अवैध अस्पतालों की पहचान कर सकें और इलाज के लिए सही संस्थान का चयन कर सकें।
सीएमओ बोले- अवैध अस्पतालों पर होगी सख्त कार्रवाई
सीएमओ ने कहा कि पोर्टल पर प्राप्त 267 आवेदन निरस्त किए गए हैं, जबकि मानक पूरा करने वाले 140 अस्पतालों को पंजीकरण दिया गया है। सभी सीएचसी को सूची उपलब्ध करा दी गई है और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध अस्पतालों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
तमकुहीराज में कार्रवाई के बाद अब निगाहें कप्तानगंज और जिले के अन्य क्षेत्रों पर हैं, जहां स्थानीय लोगों के अनुसार कई अवैध अस्पताल आज भी खुलेआम संचालित हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इन पर भी सख्ती दिखाएगा या कार्रवाई केवल चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रहेगी?





