New Anti Paper Leak बिल’ से क्या-क्या बदल जाएगा, पुराने कानून से कितना अलग है?

केंद्र सरकार के नए एंटी-पेपर लीक कानून और पुराने नियमों में क्या अंतर है? जानें 10 साल तक की जेल, 1 करोड़ रुपये के जुर्माने और कड़े प्रावधानों की पूरी जानकारी।

New Anti Paper Leak Law: देश भर में नीट (NEET), यूजीसी-नेट (UGC-NET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने नए लोक परीक्षा कानून यानी एंटी-पेपर लीक लॉ (Anti-Paper Leak Law) को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

यह नया कानून पुराने नियमों के मुकाबले बेहद सख्त और गैर-जमानती है। आइए समझते हैं कि नया एंटी-पेपर लीक कानून पुराने नियमों से कितना अलग है और इसमें क्या-क्या कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं:

10 साल तक की जेल और जुर्माना

पुराने कानून में पेपर लीक या भर्ती परीक्षा में धांधली करने पर सजा और जुर्माने की सीमा काफी सीमित और सामान्य थी, जिससे अपराधी आसानी से बच निकलते थे।

नए कानून में संगठित अपराध (Organised Crime) या किसी गिरोह/एजेंसी द्वारा पेपर लीक कराए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की कठोर जेल (Rigorous Imprisonment) की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही दोषियों पर कम से कम 1 करोड़ रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।

सर्विस प्रोवाइडर की संपत्ति होगी जब्त

पुराने समय में यदि कोई आउटसोर्स एजेंसी या परीक्षा आयोजित कराने वाली प्राइवेट कंपनी (Service Provider) धांधली में लिप्त पाई जाती थी, तो केवल उसका ठेका रद्द कर दिया जाता था या उसे ब्लैकलिस्ट किया जाता था।

नए कानून के तहत यदि कोई परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी या उसका कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उससे परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा। अपराध में शामिल संस्थानों की संपत्तियों को जब्त (Attachment of Property) करने का अधिकार भी जांच एजेंसियों के पास होगा।

गैर-जमानती अपराध

पुराने नियमों में अधिकांश धाराएं जमानती होने के कारण पेपर लीक के सरगना जेल से बाहर आकर दोबारा इस तरह के अपराधों को अंजाम देते थे। नए कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-Bailable) और गैर-समझौतावादी (Non-Compoundable) बनाए गए हैं। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है और उन्हें आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।

DSP या ACP स्तर के अधिकारी करेंगे जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। किसी भी पेपर लीक या भर्ती परीक्षा में धांधली की जांच उपनिरीक्षक (DSP) या सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर के अधिकारी से नीचे का कोई पुलिसकर्मी नहीं करेगा। केंद्र सरकार के पास यह अधिकार रहेगा कि वह किसी भी बड़े मामले की जांच सीधे सीबीआई (CBI) या किसी अन्य राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप सकती है।

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परीक्षार्थियों को राहत

इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ईमानदार परीक्षार्थियों और छात्रों को निशाना नहीं बनाया गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले आम छात्रों पर इस कड़े कानून की धाराएं लागू नहीं होंगी। अगर कोई छात्र व्यक्तिगत रूप से नकल करता पकड़ा जाता है, तो उस पर परीक्षा निकाय (जैसे NTA, UPSC आदि) के अपने मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे।

हालांकि, डमी कैंडिडेट (मुन्नाभाई) बनकर परीक्षा देने वाले या ब्लूटूथ/तकनीकी साधनों से नकल कराने वाले रैकेट के खिलाफ नए कानून की सख्त धाराओं के तहत ही केस दर्ज होगा।

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