e-Shram बनेगा गिग वर्कर्स की पहचान का आधार, भविष्य में मिलेंगे कई लाभ…

e-Shram Portal: देश में तेजी से बढ़ रही गिग इकॉनमी के बीच केंद्र सरकार ने Swiggy, Zomato, Uber, Ola, Rapido, Blinkit और Amazon जैसी कंपनियों से जुड़े लाखों कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सभी डिजिटल एग्रीगेटर कंपनियों को अपने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का e-Shram पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सरकार का उद्देश्य इन कामगारों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है, ताकि उन्हें भविष्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा लाभों का सीधा फायदा मिल सके।

क्या है e-Shram पोर्टल?
e-Shram पोर्टल केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2021 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय डेटाबेस प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों की पहचान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जारी किया जाता है, जो पूरे देश में उनकी पहचान के रूप में काम करता है।

अब सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी इस डेटाबेस का हिस्सा बना रही है। इसमें फूड डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, ई-कॉमर्स डिलीवरी एजेंट, घरेलू सेवा प्रदाता और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगार शामिल हैं।

किन कंपनियों के वर्कर्स होंगे शामिल?
श्रम मंत्रालय के अनुसार Zomato, Swiggy, Blinkit, Uber, Ola, Rapido, Amazon, Zepto, Urban Company और Porter जैसी प्रमुख कंपनियां पहले ही e-Shram प्रणाली से जुड़ चुकी हैं। अन्य एग्रीगेटर कंपनियों को भी 21 जून तक अपने कर्मचारियों और पार्टनर्स का पंजीकरण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का मानना है कि इससे देश के लाखों गिग वर्कर्स की पहचान सुनिश्चित होगी और उनके लिए भविष्य में कल्याणकारी योजनाएं लागू करना आसान हो जाएगा।

गिग वर्कर्स कौन होते हैं?
गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं जो किसी स्थायी नौकरी के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप के माध्यम से सेवाएं प्रदान करते हैं। उदाहरण के तौर पर Swiggy और Zomato के डिलीवरी पार्टनर, Ola और Uber के ड्राइवर, Urban Company के सेवा प्रदाता और Amazon के डिलीवरी एजेंट गिग वर्कर्स की श्रेणी में आते हैं।

इन कामगारों की आय आमतौर पर काम की उपलब्धता पर निर्भर करती है और अधिकांश मामलों में उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिलते। इसी वजह से सरकार उन्हें औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने की कोशिश कर रही है।

e-Shram रजिस्ट्रेशन से क्या होंगे फायदे?
e-Shram पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले कामगारों को कई संभावित लाभ मिल सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि सरकार के पास उनका आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी नई योजना का लाभ सीधे उन्हें पहुंचाया जा सकेगा।

इसके अलावा दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, पेंशन योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम, रोजगार सहायता और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी भविष्य में इसी डेटाबेस के आधार पर दिया जा सकता है। आपदा या आर्थिक संकट की स्थिति में सरकार जरूरतमंद कामगारों तक तेजी से सहायता पहुंचाने में सक्षम होगी।

सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे लाखों कामगार
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में गिग इकॉनमी तेजी से विस्तार कर रही है। लाखों युवा आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि इन कामगारों के लिए नौकरी की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा हमेशा एक चुनौती रही है।

e-Shram पोर्टल के माध्यम से सरकार इस वर्ग की वास्तविक संख्या, उनकी कार्य स्थिति और जरूरतों का आकलन कर सकेगी। इससे भविष्य में उनके लिए बेहतर नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।

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कैसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन?
कामगार e-Shram पोर्टल पर स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।

रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद श्रमिक को 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जारी किया जाता है, जो उसकी पहचान और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव का आधार बनता है।

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गिग इकॉनमी के लिए अहम कदम
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत में ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि e-Shram पोर्टल पर गिग वर्कर्स का पंजीकरण न केवल उनकी पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आने वाले समय में यह पहल लाखों डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए आर्थिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच का मजबूत माध्यम बन सकती है।

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