Main Vaapas Aaunga Review: बंटवारे के दर्द में लिपटी प्रेम कहानी, Diljit पर भारी पड़े नसीरुद्दीन

Imtiaz Ali Main Vaapas Aaunga Movie Review in Hindi: जानिए कैसी है नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना और शरवरी स्टारर भारत-पाकिस्तान बंटवारे पर बनी यह जादुई लव स्टोरी।

 Main Vaapas Aaunga Review in Hindi: जब किसी कहानी के इमोशन सीधे दिल पर चोट करें, भावनाओं को काबू में रखना नामुमकिन हो जाए और आंखें नम हो जाएं, तब समझिएगा कि आपका सामना सिनेमा की एक जादुई कृति से हुआ है। निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ एक ऐसी ही फिल्म है, जो न सिर्फ आपको भावुक करती है बल्कि आपके भीतर छिपे अनकहे जज्बातों को भी जगा देती है।

क्या है फिल्म की कहानी?

यह कहानी भारत-पाकिस्तान के बंटवारे (1947 Partition) के उस गहरे दर्द और ट्रॉमा पर आधारित है, जिसने एक पूरी पीढ़ी की जिंदगी बदलकर रख दी। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह एक बुजुर्ग सरदार जी के किरदार में हैं, जो बंटवारे के वक्त सरगोधा (अब पाकिस्तान में) से पंजाब आए थे।

सरदार जी का निकनेम ‘कीनू’ हुआ करता था। फ्लैशबैक में यंग कीनू (वेदांग रैना) और जिया (शरवरी) के कॉलेज के दिनों की खूबसूरत और बेपनाह मोहब्बत को दिखाया गया है। अब उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर बीमार सरदार जी की सांसें अटकी हुई हैं क्योंकि उनका एक अधूरा काम बाकी है उन्हें जिया और अपनी अधूरी मोहब्बत की उस गांठ को खोलना है जो सरगोधा में छूट गई थी।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब सरदार जी का पोता निर्वैर (दिलजीत दोसांझ) वापस लौटता है। निर्वैर अपनी असल जिंदगी में कमिटमेंट से भागने वाला एक कन्फ्यूज्ड लड़का है, जो स्टैंड-अप कॉमेडी में हाथ आजमा रहा है। जब वह अपने दादा की अजीबोगरीब बातों (चांद, मार्स और हिटलर के प्रतीक) के पीछे छिपे गहरे दर्द को डिकोड करना शुरू करता है, तो उसे अहसास होता है कि दादाजी की आखिरी सांसें किस अधूरे वादे के लिए थमी हुई हैं।

इम्तियाज अली का जादुई निर्देशन

‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी कल्ट फिल्में देने वाले इम्तियाज अली ने इस बार अपने करियर की बेस्ट फिल्म बनाई है। बंटवारे जैसे संवेदनशील और दर्दनाक विषय पर फिल्में तो बहुत बनी हैं, लेकिन इम्तियाज की खूबी यह है कि उन्होंने इस भयानक दौर की कहानी कहते हुए भी नफरत या कड़वाहट का एक भी छींटा फिल्म पर पड़ने नहीं दिया। यह फिल्म नफरत पर मोहब्बत की जीत और इंसानी जज्बातों की एक खूबसूरत दास्तान है।

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एक्टिंग की मास्टरक्लास

  • नसीरुद्दीन शाह: बुजुर्ग सरदार के रूप में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आंखें और खामोशी से वो दर्द बयां किया है जो केवल एक लीजेंडरी एक्टर ही कर सकता है।

  • दिलजीत दोसांझ: निर्वैर के किरदार में दिलजीत ने कमाल का काम किया है। एक कन्फ्यूज्ड लड़के से लेकर दादा के दर्द को समझने वाले पोते तक का उनका ट्रांसफॉर्मेशन स्क्रीन पर देखने लायक है।

  • वेदांग रैना और शरवरी: युवा कीनू के रोल में वेदांग रैना और जिया के रोल में शरवरी की केमिस्ट्री लाजवाब है। दोनों ने बंटवारे के दौर की मासूमियत और जुदाई की तड़प को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है।

सिनेमैटोग्राफी और संगीत

फिल्म के विजुअल्स और ए.आर. रहमान का संगीत कहानी की आत्मा हैं। गाने और बैकग्राउंड स्कोर इमोशन्स को और गहरा करते हैं, खासकर वह हिस्से जहां बंटवारे की त्रासदी को प्रतीकों (Symbols) के जरिए दिखाया गया है।

देखें या न देखें?

‘मैं वापस आऊंगा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक रूहानी अनुभव है। अगर आप बेहतरीन सिनेमा, सच्ची मोहब्बत की कहानियां और इम्तियाज अली के निर्देशन के फैन हैं, तो सिनेमाघरों में जाकर देखना बिल्कुल मिस न करें।

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