Governor Review: गवर्नर’ बन छाए मनोज बाजपेयी, अदा शर्मा ने भी किया इम्प्रेस

Governor The Silent Saviour Review: जानिए कैसी है मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा की फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’। क्या आपको यह पॉलिटिकल-इकनॉमी ड्रामा देखना चाहिए?

Governor The Silent Saviour Review: आज के दौर में जहाँ सिनेमाघरों में ज्यादातर ऐसी फिल्में आ रही हैं जहाँ ‘दिमाग घर छोड़कर’ जाना पड़ता है, वहीं निर्देशक चिन्मय डी मंडलेकर की फिल्म Governor: The Silent Saviour’ इसके बिल्कुल उलट है। यह एक बेहद गंभीर, समझदारी से भरी और इंटेलिजेंट फिल्म है, जिसे देखने के लिए आपको अपना दिमाग साथ ले जाना होगा और उसका इस्तेमाल भी करना होगा।

यह फिल्म भारत के इतिहास के एक ऐसे पन्ने को खोलती है, जिसके बारे में शायद आज की पीढ़ी को ज्यादा मालूम नहीं है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा स्टारर यह फिल्म कैसी है।

क्या है फिल्म की कहानी? (Plot)

फिल्म की कहानी हमें 1990 के उस दौर में ले जाती है जब भारत एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा था। देश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई थी, सरकारें स्थिर नहीं थीं और सबसे बड़ी बात देश आर्थिक रूप से कंगाली (Financial Crisis) की कगार पर था। भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर था और सोना गिरवी रखने की नौबत आ गई थी।

ऐसे गंभीर संकट के समय, आउट ऑफ टर्न (अचानक) एक शख्स को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का गवर्नर नियुक्त किया जाता है। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि एस. वेंकिटरमणन (S. Venkitaramanan) थे। उन्होंने कैसे अपनी सूझबूझ, कड़े फैसलों और रणनीतियों से देश को इस भयानक आर्थिक संकट से बाहर निकाला, यही इस फिल्म की मुख्य कहानी है।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले, कैसी है फिल्म?

निर्देशक चिन्मय डी मंडलेकर ने इस जटिल और तकनीकी विषय को बेहद जिम्मेदारी के साथ स्क्रीन पर उतारा है। चूंकि यह फिल्म अर्थशास्त्र (Economy) और बैंकिंग से जुड़ी है, इसलिए इसमें कोई कड़कड़ाते हुए एक्शन सीन्स या बिना वजह के बॉलीवुड मसाले और गॉसिप नहीं हैं।

फिल्म का मिजाज काफी हद तक एक ‘डॉक्यू-ड्रामा’ (Docu-Drama) जैसा है। फिल्म के किरदार बहुत रियलिस्टिक लगते हैं और कहीं भी ओवर-ड्रामेटिक होने की कोशिश नहीं की गई है।

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मनोज बाजपेयी का एक और मास्टरक्लास

अभिनय की बात करें तो मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मौजूदा दौर में उनसे बड़ी एक्टिंग रेंज किसी के पास नहीं है।

  • मनोज बाजपेयी: उन्होंने पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकिटरमणन के किरदार को जिया है। उनकी साउथ इंडियन टोन, बात करने का धीमा अंदाज, बॉडी लैंग्वेज और उम्र के हिसाब से उनका हल्का सा झुककर चलना यह दिखाता है कि मनोज हर किरदार की नब्ज कितनी गहराई से पकड़ते हैं।

  • अदा शर्मा (Adah Sharma): अदा शर्मा ने फिल्म में एक पत्रकार (Journalist) की भूमिका निभाई है। भले ही उनका स्क्रीन टाइम छोटा है, लेकिन वह अपने किरदार में गहरी छाप छोड़ जाती हैं।

  • सह-कलाकार: सीनियर एक्ट्रेस मधू ने मनोज वाजपेयी की पत्नी के रूप में शानदार काम किया है। नौशाद मोहम्मद कुंजू ने डिप्टी गवर्नर और पारितोष सैंड ने आरबीआई टीम के अहम सदस्य के रूप में दमदार अभिनय किया है। मुकेश छाबड़ा की कास्टिंग एकदम सटीक है, हर किरदार अपनी जगह फिट बैठता है।

फिल्म देखें या छोड़ दें? (Conclusion)

‘Governor: The Silent Saviour’ सबके लिए नहीं है। अगर आप सिनेमाघर में नाच-गाना, कॉमेडी या ताबड़तोड़ एक्शन ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।

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