50 साल पुरानी शहादत को याद कर भावुक हुए नेतन्याहू, जानिए कौन थे योनी नेतन्याहू

Operation Entebbe: इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में अपने बड़े भाई Yonatan Netanyahu को याद करते हुए उन्हें “इसराइल का हीरो” बताया। नेतन्याहू ने कहा कि 50 वर्ष पहले उन्होंने अपने बड़े भाई को खो दिया था, लेकिन उनकी स्मृति आज भी इसराइली जनता और सेना के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

योनाथन नेतन्याहू, जिन्हें आमतौर पर “योनी” के नाम से जाना जाता है, इसराइली सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी थे। उनकी पहचान दुनिया के सबसे साहसी सैन्य अभियानों में से एक माने जाने वाले Operation Entebbe के कमांडर के रूप में है।

क्या था एंटेबे ऑपरेशन?
27 जून 1976 को Air France Flight 139 का अपहरण कर लिया गया था। विमान तेल अवीव से पेरिस जा रहा था और बीच रास्ते में उसे अपहर्ताओं ने युगांडा के Entebbe International Airport पर उतारने के लिए मजबूर कर दिया।

अपहर्ताओं ने विमान में सवार यात्रियों को बंधक बना लिया और बदले में कैद आतंकवादियों की रिहाई की मांग की। इस संकट ने इसराइल के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

4,000 किलोमीटर दूर चलाया गया अभियान
बंधकों को छुड़ाने के लिए इसराइली सरकार ने एक बेहद जोखिम भरे सैन्य अभियान की योजना बनाई। लगभग 4,000 किलोमीटर दूर स्थित युगांडा में सेना भेजना उस समय असंभव जैसा माना जा रहा था।

3-4 जुलाई 1976 की रात इसराइली कमांडो दस्ते ने एंटेबे एयरपोर्ट पर अचानक हमला किया। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल योनाथन नेतन्याहू कर रहे थे। कुछ ही मिनटों में कमांडो ने अधिकांश बंधकों को मुक्त करा लिया और अपहर्ताओं को मार गिराया।

मिशन सफल, लेकिन कमांडर शहीद
ऑपरेशन अपने उद्देश्य में लगभग पूरी तरह सफल रहा, लेकिन इसी दौरान योनाथन नेतन्याहू गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

वे इस पूरे अभियान में मारे जाने वाले एकमात्र इसराइली कमांडो थे। उनकी शहादत ने उन्हें इसराइल में राष्ट्रीय नायक का दर्जा दिलाया।

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क्यों माना जाता है सबसे दुस्साहसी मिशन?
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार एंटेबे ऑपरेशन कई कारणों से ऐतिहासिक माना जाता है:

  • दुश्मन देश में हजारों किलोमीटर दूर जाकर अभियान चलाया गया।
  • बंधकों को न्यूनतम नुकसान के साथ बचाया गया।
  • ऑपरेशन की योजना और क्रियान्वयन बेहद गोपनीय और सटीक था।
  • इसने दुनिया भर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

इस अभियान को बाद में “ऑपरेशन योनाथन” नाम भी दिया गया, ताकि इसके कमांडर योनाथन नेतन्याहू की स्मृति को सम्मान दिया जा सके।

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आज भी इसराइल में हैं प्रेरणा का स्रोत
योनाथन नेतन्याहू को आज भी इसराइल में साहस, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू कई मौकों पर अपने भाई का उल्लेख करते हुए कहते रहे हैं कि उनकी शहादत ने उनके जीवन और राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया है।

एंटेबे ऑपरेशन और योनाथन नेतन्याहू की कहानी आज भी इसराइल के सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में शामिल है।

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