
अलीगंज में मौत की आग! कोचिंग सेंटर में 14 छात्रों की दर्दनाक मौत…
Lucknow Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक ऐसी त्रासदी की गवाह बनी, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे में अब तक 14 छात्र-छात्राओं की मौत की खबर सामने आई है, जबकि 16 से अधिक छात्र गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं और विभिन्न अस्पतालों में उनका उपचार चल रहा है।
हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार, अफरा-तफरी और मातम का माहौल फैल गया। कोचिंग सेंटर में पढ़ने आए छात्र कुछ ही मिनटों में आग और जहरीले धुएं के बीच फंस गए। कई छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया।
आग ने कुछ ही मिनटों में लिया विकराल रूप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय इमारत के निचले हिस्से में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई, जहां कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था। आग के साथ उठने वाले घने काले धुएं ने पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया।
कोचिंग में मौजूद छात्र-छात्राएं बाहर निकलने के लिए भागे, लेकिन धुएं और आग की वजह से कई रास्ते बंद हो गए। कुछ छात्रों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों और छज्जों का सहारा लिया, जबकि कई अंदर ही फंस गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में सामने आए दर्दनाक दृश्य
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घंटों चले राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कई छात्रों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया।
रेस्क्यू टीमों ने धुएं से भरी इमारत में प्रवेश कर एक-एक छात्र को खोजने का प्रयास किया। कई छात्र गंभीर रूप से झुलसे हुए मिले, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, कुछ छात्रों को बचाया नहीं जा सका।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, बाहर खड़े अभिभावक अपने बच्चों के नाम पुकारते रहे और हर निकलने वाले छात्र को उम्मीद भरी निगाहों से देखते रहे।
घटनास्थल पर भावुक हुए डिप्टी सीएम
हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। जब इमारत से छात्रों के शव बाहर निकाले जा रहे थे और घायलों को अस्पताल भेजा जा रहा था, तब वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था।
मीडिया से बातचीत के दौरान ब्रजेश पाठक अपने आंसू नहीं रोक पाए। कैमरे के सामने ही उनकी आंखें भर आईं और वे भावुक हो गए।
उन्होंने कहा, “यह बेहद हृदयविदारक घटना है। जिन बच्चों ने अपने भविष्य के सपने लेकर यहां कदम रखा था, आज उनकी मौत की खबर सुनकर पूरा प्रदेश शोक में है। हमारी प्राथमिकता हर संभव जीवन को बचाने की थी, लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।”
अस्पतालों में मची अफरा-तफरी
घायलों को शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई छात्रों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पतालों में परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई।
डॉक्टरों की विशेष टीमें घायलों के इलाज में जुटी हैं। प्रशासन ने सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
फायर सेफ्टी पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भवन में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास व्यवस्था नहीं थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में कई व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही है। अब यह जांच का विषय बन गया है कि संबंधित संस्थान और भवन प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों का पालन किया था या नहीं।
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जांच के आदेश
राज्य सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को आग लगने के कारणों, भवन की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित लापरवाही की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों की सहायता के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा पर भी विचार शुरू कर दिया है।
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पूरे प्रदेश में शोक की लहर
इस दर्दनाक हादसे ने केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ कोचिंग भेजा था, उनके घरों में अब मातम पसरा हुआ है।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर जगह इस घटना को लेकर शोक व्यक्त किया जा रहा है। लोग मृत छात्रों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
लखनऊ का यह अग्निकांड एक बार फिर याद दिलाता है कि शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भयावह कीमत वसूल सकती है।
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