लखनऊ हादसे पर PM Modi की संवेदना, पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल देने का ऐलान

Lucknow fire news: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 14 छात्र-छात्राओं की मौत और कई अन्य के गंभीर रूप से झुलसने की खबर सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा करते हुए दुख की इस घड़ी में हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की मंजूरी दी है। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।


देशभर में शोक की लहर
लखनऊ में हुए इस भीषण हादसे ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को भावुक कर दिया है। कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहे छात्र अपने भविष्य को संवारने के सपने लेकर वहां पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग की लपटों और जहरीले धुएं ने सब कुछ बदल दिया।

घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों में गहरा दुख और आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग मृत छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ में हुई यह दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने देने के निर्देश भी दिए हैं। केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकार के संपर्क में बनी हुई है और स्थिति पर नजर रख रही है।

घायलों का जारी है उपचार
हादसे में झुलसे कई छात्रों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है। कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

राज्य सरकार ने अस्पताल प्रशासन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पतालों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।

राहत कार्यों में जुटा प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान फंसे हुए छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया गया।

स्थानीय लोगों ने भी राहत एवं बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि आग की तीव्रता और धुएं के कारण कई छात्रों को बचाया नहीं जा सका।

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जांच के आदेश
हादसे के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आग कैसे लगी, क्या भवन में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे और कहीं किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं हुई। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

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परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
जिन परिवारों ने अपने बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ कोचिंग भेजा था, आज उनके घरों में मातम पसरा हुआ है। कई अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आर्थिक सहायता भले ही पीड़ित परिवारों को कुछ राहत दे सके, लेकिन अपनों को खोने का दर्द शायद ही कभी कम हो सकेगा।

लखनऊ का यह अग्निकांड एक बार फिर देशभर में शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर बहस छेड़ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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