UP News: ‘बदले की भावना से दर्ज हुआ रेप केस’—इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के एक मामले में रेप की चार्जशीट रद्द करते हुए कहा कि आपसी सहमति के प्रेम संबंध टूटने पर उसे अपराध या दुष्कर्म का रूप देना गलत है।

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से बने प्रेम संबंधों और विवाह के झूठे वादे को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रेम संबंधों के टूटने के बाद उन्हें ‘अपराध का रंग देना’ और रेप का मुकदमा दर्ज कराना एक चिंताजनक चलन बनता जा रहा है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कानपुर के एक युवक के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

कानपुर के एक कोचिंग सेंटर में साथ पढ़ने वाले युवक और युवती के बीच साल 2021 से 2024 के बीच प्रेम संबंध थे। इस दौरान दोनों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध भी बने। दिसंबर 2024 में जब युवक की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में नौकरी लग गई और उसके पिता ने इस शादी से इनकार कर दिया, तो युवती ने युवक के खिलाफ धोखे से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज करा दिया।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  • वादा टूटना और धोखा देना अलग: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘शादी का झूठा वादा करना’ (शुरुआत से ही नीयत साफ न होना) और ‘शादी का वादा न निभा पाना’ (हालात के कारण), दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। अगर शुरुआत से ही नीयत धोखा देने की न हो, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

  • सहमति का रिश्ता अपराध नहीं: कोर्ट ने पाया कि पीड़िता 28 वर्ष की एक समझदार वयस्क महिला है। वह 3 साल तक रिश्ते में रही और इस दौरान उसने कोई शिकायत नहीं की। दोनों के संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे, जिसकी पुष्टि तस्वीरों और गवाहों से भी हुई।

  • बदले की भावना से केस: अदालत ने कहा कि जब 3 साल पुराना रिश्ता शादी में नहीं बदल सका, तो प्रेमी के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराना केवल टूटे हुए रिश्ते का बदला लेने जैसा प्रतीत होता है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आरोपी उदित शुक्ल के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को खारिज कर दिया।

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