
Pacific में चीन का मिसाइल धमाका, जापान-ऑस्ट्रेलिया ने जताई कड़ी चिंता
China Tests Missile: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी (न्यूक्लियर सबमरीन) से लंबी दूरी की एक रणनीतिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
इस परीक्षण के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सामरिक संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने चीन के इस कदम पर चिंता व्यक्त करते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नौसेना के अनुसार, यह परीक्षण सोमवार दोपहर करीब 12:01 बजे प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल में वास्तविक परमाणु हथियार के बजाय एक नकली (डमी) वारहेड लगाया गया था, जिसने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।
चीन ने बताया नियमित सैन्य अभ्यास
चीनी सेना ने कहा कि यह परीक्षण उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण योजना का हिस्सा था और इसका उद्देश्य हथियार प्रणाली की क्षमता और विश्वसनीयता का आकलन करना था। बीजिंग ने दावा किया कि परीक्षण पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों के अनुरूप किया गया तथा इससे किसी भी देश की सुरक्षा को खतरा नहीं है।
चीन का कहना है कि अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना उसका संप्रभु अधिकार है और ऐसे सैन्य अभ्यास किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किए जाते।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने जताई चिंता
चीन के मिसाइल परीक्षण के बाद जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। दोनों देशों ने कहा कि इस प्रकार के सैन्य परीक्षण क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकते हैं और इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
जापान ने चीन से सैन्य गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता बरतने और पड़ोसी देशों को समय रहते जानकारी देने की अपील की। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
क्यों अहम है यह परीक्षण?
विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु-संचालित पनडुब्बी से लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किसी भी देश की ‘सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ यानी परमाणु हमले के बाद भी जवाबी हमला करने की क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ऐसी पनडुब्बियां लंबे समय तक समुद्र में गुप्त रूप से तैनात रह सकती हैं और जरूरत पड़ने पर हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम होती हैं। यही कारण है कि इस तरह के परीक्षणों को वैश्विक सामरिक संतुलन के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
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इंडो-पैसिफिक में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों, दक्षिण चीन सागर में उसके दावों और ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्रीय देशों की चिंता लगातार बढ़ी है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगी देश भी इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह मिसाइल परीक्षण उसी व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, जिसमें क्षेत्र की प्रमुख शक्तियां अपनी सैन्य क्षमताओं का लगातार प्रदर्शन कर रही हैं।
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क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी निगाहें
चीन के इस परीक्षण के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा हालात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सैन्य गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो तनाव और अविश्वास की स्थिति गहरा सकती है। ऐसे में संवाद, पारदर्शिता और कूटनीतिक प्रयास ही क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं।
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