
डिजिटल सिग्नेचर से सरकारी खजाने में सेंध, बस्तर पुलिस के 3 आरक्षक गिरफ्तार
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग के भीतर करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने से महकमे में हड़कंप मच गया है। बस्तर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की वेतन शाखा में पदस्थ तीन आरक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों (Digital Signature) का दुरुपयोग कर वेतन संबंधी देयकों में कूटरचना की और पिछले तीन वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि का गबन किया।
मामले का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों के बाद हुआ। ऑडिट के दौरान वेतन भुगतान और वित्तीय अभिलेखों की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद पुलिस विभाग ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू कर दी।
22 जून को सामने आई ऑडिट आपत्ति
जानकारी के अनुसार, 22 जून को कैग ऑडिट के दौरान वेतन शाखा में वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ी आपत्ति दर्ज की गई। इसके बाद बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल विभागीय जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने पर तीनों आरोपित आरक्षकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
तीन आरक्षक गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में आरक्षक क्रमांक 450 गिरीश राय, आरक्षक क्रमांक 289 राजकुमार कतलम और डीएसएफ आरक्षक क्रमांक 4003 हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कथित गबन में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल था या नहीं।
डिजिटल हस्ताक्षरों का कथित दुरुपयोग
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षरों का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए वेतन संबंधी दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया। इस तरीके से सरकारी खाते से करोड़ों रुपये निकाले गए। डिजिटल हस्ताक्षर सरकारी वित्तीय लेन-देन में महत्वपूर्ण सुरक्षा माध्यम माने जाते हैं, इसलिए इनके दुरुपयोग को गंभीर साइबर और वित्तीय अपराध माना जा रहा है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन से संबंधित धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
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जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड, डिजिटल लॉग, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग में मचा हड़कंप
जिस विभाग पर कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी धन की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी विभाग के एसपी कार्यालय में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने से पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं।
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