PM मोदी की इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो से मुलाकात, रक्षा और समुद्री सहयोग पर चर्चा

PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री Modi मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा। दोनों देशों के बीच 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।

एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया विशेष स्वागत

जकार्ता पहुंचने पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो ने स्वयं एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। इस पर खुशी जताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस गर्मजोशी भरे स्वागत से दोनों देशों की मजबूत मित्रता झलकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत से भारत और इंडोनेशिया के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।

रक्षा, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर रहेगा जोर

भारत और इंडोनेशिया के बीच होने वाली वार्ता में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने, आवश्यक खनिजों की आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल इकोनॉमी में साझेदारी को विस्तार देने पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले भी ले सकते हैं।

प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी करेंगे दौरा

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो योग्याकार्ता स्थित Prambanan Temple Compounds का संयुक्त दौरा करेंगे। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है। माना जा रहा है कि दोनों नेता मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनरुद्धार (Restoration) कार्य की शुरुआत से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा भी कर सकते हैं।

भारतीय समुदाय से भी करेंगे संवाद

इंडोनेशिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी वहां रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अवसर दोनों देशों के सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव

इंडोनेशिया प्रधानमंत्री मोदी के तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। यहां की यात्रा पूरी करने के बाद वह उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड रवाना होंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होगा।

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