कार्यकाल समाप्त, लेकिन जिम्मेदारी बरकरार… सरकार ने अध्यक्षों को बनाया प्रशासक

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की सभी जिला पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को समाप्त होने के बाद सरकार ने मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक (Administrator) के रूप में कार्य करने की अनुमति दे दी है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया।

सरकार का कहना है कि नई जिला पंचायतों के गठन तक विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए, इसलिए यह अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।

2021 में गठित हुई थीं वर्तमान जिला पंचायतें
प्रदेश में वर्ष 2021 में जिला पंचायतों का गठन हुआ था। पंचायती राज व्यवस्था के तहत इनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जो 11 जुलाई 2026 को पूरा हो गया। ऐसे में नई जिला पंचायतों के गठन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक था।

इसी आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्तमान अध्यक्षों को अंतरिम रूप से प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है।

छह महीने या नई पंचायत के गठन तक रहेंगे प्रशासक
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष नई जिला पंचायतों के गठन तक अथवा अधिकतम छह महीने की अवधि तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।

हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान प्रशासक के रूप में वे केवल नियमित, आवश्यक और प्रशासनिक प्रकृति के कार्य ही कर सकेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य जिला पंचायत के दैनिक कार्यों का संचालन और विकास योजनाओं की निरंतरता बनाए रखना होगा।

विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार का मानना है कि यदि कार्यकाल समाप्त होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तो जिला पंचायतों के माध्यम से संचालित विकास योजनाएं, भुगतान, रखरखाव और अन्य आवश्यक प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

नई व्यवस्था के तहत सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े नियमित कार्य पहले की तरह जारी रहेंगे।

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अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लिया गया है। इसका उद्देश्य नई जिला पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना है। नई जिला पंचायतों के गठन और नए अध्यक्षों के पदभार ग्रहण करने के बाद यह व्यवस्था स्वतः समाप्त हो जाएगी।

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प्रशासक के अधिकारों पर रहेगी सीमा
सरकारी आदेश के अनुसार, प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे जिला पंचायत अध्यक्ष नियमित प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे। इस दौरान वे केवल आवश्यक और पूर्व निर्धारित कार्यों को ही आगे बढ़ाएंगे। किसी भी बड़े नीतिगत निर्णय या ऐसे कार्य, जिनके लिए निर्वाचित निकाय की स्वीकृति आवश्यक हो, उन्हें संबंधित नियमों और शासनादेशों के अनुरूप ही किया जाएगा।

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