भारत ने रचा इतिहास! प्राइवेट रॉकेट Vikram-1 की सफल लॉन्चिंग, अंतरिक्ष में गूंजा ‘वंदे मातरम’

स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा से भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया है।

योजनाबद्ध देरी के बाद भरी शानदार उड़ान

शनिवार सुबह इस ऐतिहासिक मिशन को ‘मिशन आगमन’ (Mission Aagaman) नाम दिया गया था।पहले इस रॉकेट के उड़ान भरने का समय सुबह 11:30 बजे तय किया गया था, लेकिन तकनीकी जांच और ऑटोमेटेड लॉन्च सीक्वेंस (ALS) के तहत एक ‘प्लांड होल्ड’ (नियोजित ठहराव) के कारण इसे 35 मिनट आगे बढ़ाया गया। इसके बाद दोपहर ठीक 12:05 बजे रॉकेट ने आसमान की ओर गर्जना भरी।

करीब 16 मिनट के सफर के बाद विक्रम-1 रॉकेट ने अपने फाइनल बर्न को पूरा किया और घरेलू व विदेशी पेलोड्स को धरती से करीब 450 किलोमीटर ऊपर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

यह भी पढ़ें…

मॉक ड्रिल के बहाने खेल गई दिल्ली पुलिस, 30 सेकंड में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाया

PM मोदी का खास संदेश गया अंतरिक्ष

इस ऐतिहासिक टेस्ट फ्लाइट-1 के जरिए अंतरिक्ष में एक बेहद खास पेलोड भेजा गया है। रॉकेट अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा एक हस्ताक्षरित (Signed) पोस्टकार्ड लेकर गया है, जिस पर “वंदे मातरम” लिखा हुआ है। इसके साथ ही दुनिया भर के लोगों की शुभकामनाओं वाले सैकड़ों अन्य कार्ड्स भी अंतरिक्ष भेजे गए हैं।

यह भी पढ़ें…

Puri Rath Yatra का अहम पड़ाव पूरा, 9 लाख श्रद्धालुओं ने खींचे भगवान के रथ…

आधुनिक तकनीक से लैस है विक्रम-1

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर बने इस सात मंजिला ऊंचे रॉकेट की कई खास बातें हैं। पूरा रॉकेट ऑल-कार्बन कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना है, जिससे यह बेहद हल्का और मजबूत है। रॉकेट में तीन सॉलिड-प्रोपेलेंट चरण हैं. इसके ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में इन-हाउस विकसित (Raman Engine) का इस्तेमाल किया गया है। यह ठोस ईंधन आधारित रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।

इस बार इसमें ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व और डीक्यूब्ड जैसी कंपनियों के तकनीकी पेलोड भेजे गए हैं। इस सफलता के साथ स्काईरूट अब अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने के लिए “कैब सर्विस” (ऑन-डिमांड लॉन्चिंग) देने के अपने लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गया है, जहां निजी कंपनियां अपने छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत में सीधे अंतरिक्ष भेज सकेंगी।

यह भी पढ़ें…

‘मैं भूत बनकर वापस आऊंगा…’, संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का भावुक संदेश

Back to top button