SC के अंतरिम आदेश से नाराज़ अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर पर फिर धरने की चेतावनी…

Suprime Court on CJP: देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर असंतोष व्यक्त करते हुए संकेत दिए हैं कि छात्र आंदोलन का दूसरा चरण जल्द शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से कदम नहीं उठाती, तो वह फिर से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठेंगे।

दीपके ने कहा कि छात्र आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए शुरू किया गया था। उनका दावा है कि आंदोलन के दौरान जिन छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उनमें से कई के खिलाफ विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज की गईं, उन्हें हिरासत में लिया गया और कई जगह बल प्रयोग भी किया गया। उनका कहना है कि इन सभी मामलों में न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।

‘अंतरिम आदेश से छात्रों की चिंता दूर नहीं हुई’
अभिजीत दीपके का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से छात्रों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उनके अनुसार अदालत ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार जरूर किया, लेकिन छात्रों को तत्काल राहत देने और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को उम्मीद थी कि अदालत प्रदर्शनकारी छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण छात्रों में निराशा का माहौल है।

सरकार को दिया स्पष्ट संदेश
दीपके ने केंद्र सरकार से मांग की कि छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए, निर्दोष छात्रों के खिलाफ कार्रवाई वापस ली जाए और जिन अधिकारियों पर शक्ति के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, उनकी भी जांच कराई जाए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो देशभर के छात्र संगठनों को साथ लेकर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में होगा।

36 दिनों तक चला था ऐतिहासिक आंदोलन
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चला पिछला आंदोलन लगातार 36 दिनों तक सुर्खियों में रहा। जंतर-मंतर पर हजारों छात्र जुटे थे और संसद मार्च के दौरान भी बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। आंदोलन के कारण शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई थी।

लंबे आंदोलन के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई थी, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया। हालांकि दीपके का कहना है कि आंदोलन केवल स्थगित हुआ था, समाप्त नहीं।

छात्र संगठनों से समर्थन की अपील
दीपके ने देशभर के छात्र संगठनों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में एकजुट रहें। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे किसी एक संगठन के नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं।

उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की भी अपील की। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से किया गया आंदोलन ही सबसे प्रभावी माध्यम है।

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सरकार की ओर से अभी नहीं आया जवाब
अभिजीत दीपके की चेतावनी के बाद केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जंतर-मंतर पर दोबारा बड़ा छात्र आंदोलन शुरू होता है, तो इसका असर संसद, शिक्षा नीति और सरकार की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।

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अब अगली सुनवाई और सरकार के फैसले पर नजर
फिलहाल पूरे मामले में निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि छात्रों की मांगों को लेकर कोई ठोस पहल नहीं होती, तो जंतर-मंतर एक बार फिर देशव्यापी छात्र आंदोलन का केंद्र बन सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना रहने की संभावना है।

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