
UP बनेगा आध्यात्मिक पर्यटन का हब, 17 धार्मिक परियोजनाओं को मिली मंजूरी…
UP Tourism: उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के ऋषियों, गुरुओं और संतों की तपोभूमि के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए 17 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच स्वीकृत इन परियोजनाओं के तहत ऋषि आश्रमों, तपोस्थलों, गुरुद्वारों और संतों से जुड़े पवित्र स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश
पर्यटन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को सभी स्वीकृत परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। इसलिए निर्माणाधीन परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
गुरु गोरखनाथ से जुड़े स्थलों का होगा विशेष विकास
परियोजनाओं के तहत महोबा के गोरखगिरि पर्वत स्थित नाथ संप्रदाय के प्रमुख आस्था केंद्र का विशेष विकास किया गया है। यहां 11.25 करोड़ रुपये की लागत से गुरु गोरखनाथ की 51 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगी।
वहीं अमेठी के जायस में 5.95 करोड़ रुपये की लागत से गुरु गोरखनाथ की 25 फीट ऊंची योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह स्थल धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा।
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संत रविदास जन्मस्थली का हुआ पुनर्विकास
सरकार ने वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। इस परियोजना पर 51.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं, आधुनिक आधारभूत ढांचा, सौंदर्यीकरण और पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।
धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी लाभ होगा। इससे हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
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सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने पर जोर
योगी सरकार का कहना है कि धार्मिक स्थलों का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करना भी है। सरकार भविष्य में भी ऐसे अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में नई परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है।
इन 17 परियोजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश न केवल धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान को और सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में अपनी छवि को भी और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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