‘कलयुग की श्रवण कुमार’ बनीं काजल चौधरी, सास को कांवड़ में बैठाकर शुरू की यात्रा…

Kajal Choudhary Kanwar Yatra: सावन के पवित्र महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा हर साल आस्था, भक्ति और समर्पण की अनगिनत मिसालें पेश करती है। इस बार दिल्ली की रहने वाली काजल चौधरी ने अपनी 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली के शाहदरा तक की यात्रा शुरू कर लोगों का दिल जीत लिया है। कंधों पर कांवड़ और उसमें बैठी वृद्ध सास की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग काजल की तुलना श्रवण कुमार से कर रहे हैं और उन्हें “कलयुग की श्रवण कुमार” कहकर सम्मान दे रहे हैं।

सेवा और समर्पण की अनोखी मिसाल
दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी ने अपनी बुजुर्ग सास की इच्छा पूरी करने के लिए यह अनोखा निर्णय लिया। उन्होंने अपनी सास को विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में बैठाया और हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा शुरू की।

रास्ते में जहां-जहां से यह कांवड़ गुजर रही है, लोग रुककर इस दृश्य को देख रहे हैं। कई श्रद्धालु काजल के समर्पण की सराहना कर रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।

दूसरे साल भी निभाई परंपरा
यह पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। वर्ष 2025 में भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इस बार भी उन्होंने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी सास की सेवा को सर्वोपरि रखा है।

काजल का कहना है कि उनके लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि परिवार के प्रति सम्मान, सेवा और संस्कारों का प्रतीक है। उनका मानना है कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा धर्म है।

श्रवण कुमार की याद दिलाती तस्वीर
भारतीय संस्कृति में श्रवण कुमार को माता-पिता की सेवा और समर्पण का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। काजल चौधरी की यह यात्रा उसी भावना को जीवंत करती नजर आ रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार यह भूमिका एक बहू निभा रही है।

सोशल मीडिया पर लोग उनकी तस्वीरें साझा करते हुए लिख रहे हैं कि आज के दौर में भी ऐसे उदाहरण समाज को पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देते हैं।

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सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना
काजल चौधरी की यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। हजारों लोग उनकी सेवा भावना की प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच यह घटना रिश्तों की अहमियत और भारतीय संस्कृति के मूल्यों की याद दिलाती है।

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आस्था के साथ संस्कारों का संदेश
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और समर्पण की भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। काजल चौधरी ने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर यह संदेश दिया है कि परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। उनकी यह पहल न केवल श्रद्धालुओं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है।

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