Tamil Nadu में नया सियासी विवाद, परिसीमन पर बैठक से पहले DMK की बड़ी मांग

Tamil Nadu News: तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) और कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय परामर्श बैठक से पहले मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सरकार के सामने नई शर्त रख दी है। डीएमके ने स्पष्ट किया है कि उसे परिसीमन पर चर्चा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को पहले मेकेदातु बांध विवाद पर सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलानी चाहिए।

डीएमके का कहना है कि कावेरी नदी से जुड़ा यह मुद्दा तमिलनाडु के किसानों और राज्य के जल अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

8 अगस्त को बुलाई गई है अहम बैठक
मुख्यमंत्री विजय ने 8 अगस्त को चेन्नई में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ परिसीमन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को आमंत्रित किया गया है, ताकि संभावित परिसीमन के प्रभावों पर व्यापक चर्चा की जा सके।

बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा भविष्य में होने वाली परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु का साझा रुख तैयार करना बताया जा रहा है।

DMK ने रखी स्पष्ट शर्त
सीएम विजय के निमंत्रण का जवाब देते हुए डीएमके ने कहा कि वह लोकतांत्रिक संवाद का समर्थन करती है और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी। लेकिन पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को पहले मेकेदातु बांध विवाद पर सभी दलों की बैठक बुलाकर राज्य का साझा दृष्टिकोण तय करना चाहिए।

डीएमके नेताओं का कहना है कि कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना तमिलनाडु के जल हितों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इस मुद्दे पर सभी दलों की सहमति बनाना अधिक जरूरी है।

क्या है मेकेदातु बांध विवाद?
मेकेदातु बांध परियोजना कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित योजना है, जिसे कावेरी नदी पर विकसित करने की बात कही गई है। कर्नाटक का तर्क है कि इस परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

वहीं तमिलनाडु का कहना है कि इस बांध के निर्माण से कावेरी के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे राज्य के किसानों और सिंचाई व्यवस्था को नुकसान होने की आशंका है। इसी कारण यह विवाद वर्षों से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बना हुआ है।

परिसीमन भी बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर भी लगातार बहस चल रही है। कई राजनीतिक दलों को आशंका है कि भविष्य में जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण से दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय राज्य के सांसदों के साथ चर्चा कर संभावित रणनीति तैयार करना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों को एकजुट होकर अपनी राय रखनी चाहिए।

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
डीएमके ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों की बजाय केवल परिसीमन पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि मेकेदातु बांध का मामला किसानों और राज्य के जल अधिकारों से जुड़ा है।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि परिसीमन भी तमिलनाडु के भविष्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण विषय है और इस पर समय रहते चर्चा आवश्यक है।

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बैठक पर टिकी निगाहें
अब राजनीतिक हलकों की नजर 8 अगस्त को होने वाली बैठक पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डीएमके अपनी शर्तों के साथ बैठक में शामिल होती है या नहीं। यदि सरकार मेकेदातु मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला करती है, तो राज्य की राजनीति में नई सहमति बनने की संभावना भी बन सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन और मेकेदातु जैसे दोनों मुद्दे आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति के प्रमुख चुनावी विषय बन सकते हैं, क्योंकि दोनों ही राज्य के अधिकारों और क्षेत्रीय हितों से जुड़े हुए हैं।

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