
तीन घंटे का नया नियम लागू, केजरीवाल बोले- सरकार को Gen Z से डर लगने लगा है…
Action on Deepfake AI Content: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वैध सरकारी आदेश या अदालत के निर्देश के बाद गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री हटाने की समय-सीमा 36 घंटे से घटाकर केवल 3 घंटे कर दी है। वहीं, नग्नता, यौन शोषण, बच्चों से जुड़े संवेदनशील कंटेंट और अन्य अत्यधिक गंभीर मामलों में कार्रवाई की समय-सीमा 2 घंटे तय की गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस नियम की आलोचना करते हुए कहा कि “सरकार Gen Z से डर गई है।”
क्या है नया नियम?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी सोशल मीडिया कंपनी को सरकार या सक्षम न्यायालय की ओर से किसी कंटेंट को हटाने का वैध आदेश मिलता है, तो उसे अब अधिकतम 3 घंटे के भीतर उस सामग्री को हटाना या उस तक पहुंच रोकनी होगी।
इसके अलावा, यदि मामला अश्लीलता, नग्नता, यौन उत्पीड़न, बच्चों के यौन शोषण या अन्य अत्यधिक संवेदनशील सामग्री से जुड़ा है, तो प्लेटफॉर्म को 2 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य इंटरनेट पर अवैध और हानिकारक सामग्री के तेजी से प्रसार को रोकना तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक जवाबदेह बनाना है।
पहले क्या था नियम?
अब तक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को वैध सरकारी या न्यायिक आदेश मिलने के बाद आपत्तिजनक या गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। नए संशोधन के बाद यह अवधि घटाकर केवल 3 घंटे कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और अधिक तेज और प्रभावी बनानी होगी।
केजरीवाल का सरकार पर हमला
नए नियम पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं, खासकर Gen Z की आवाज से घबरा गई है और सोशल मीडिया पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया आज युवाओं के लिए अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। उनके अनुसार, सरकार इस स्वतंत्र अभिव्यक्ति को सीमित करने की दिशा में कदम उठा रही है।
हालांकि, यह टिप्पणी केजरीवाल का राजनीतिक बयान है और सरकार ने नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन सुरक्षा और कानून के पालन को मजबूत करना बताया है।
मोदी सरकार का नया कानून आया है। अगर सरकार किसी भी social media platform को कोई पोस्ट delete करने के लिए कहती है, तो उन्हें 3 घंटे के भीतर उसे delete करना होगा।
Gen Z के आंदोलन के बाद से ही मोदी जी को बहुत डर लगने लगा है। मोदी जी, आप जितना देश के लोगों की आवाज़ दबाएंगे, उनका… pic.twitter.com/XSlFRBHXs2
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 7, 2026
सरकार का क्या है पक्ष?
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरें, साइबर अपराध, घृणा फैलाने वाली सामग्री और अवैध कंटेंट तेजी से फैलता है। ऐसे में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि समाज में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित न हो।
सरकार के अनुसार, यह नियम केवल वैध सरकारी आदेश या सक्षम न्यायालय के निर्देश मिलने के बाद ही लागू होगा। इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि गैरकानूनी सामग्री पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
नए नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को अपने शिकायत निवारण तंत्र और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को पहले से अधिक तेज बनाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त तकनीकी संसाधन और मानवबल लगाना पड़ सकता है।
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नई बहस की शुरुआत
सरकार के इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। समर्थकों का कहना है कि इससे इंटरनेट पर अवैध और हानिकारक सामग्री पर तेजी से रोक लगेगी, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
आने वाले दिनों में इस नियम का असर सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली, डिजिटल अधिकारों और ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किस तरह पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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