‘गोरखपुर मॉडल के साथ गुजरात मॉडल भी बेनकाब’, आनंदीबेन के बयान पर अखिलेश का तंज

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिए गए बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर राज्यपाल द्वारा जताई गई नाराजगी और गुजरात से जुड़ा उदाहरण देने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है।

अखिलेश यादव ने कहा कि राज्यपाल के बयान ने केवल गोरखपुर की व्यवस्थाओं पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि गुजरात मॉडल की वास्तविकता भी सामने ला दी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए कहा कि अब “डबल इंजन सरकार ट्रबल इंजन बन गई है।”

क्या कहा था राज्यपाल ने?
गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और अपने संबोधन के दौरान गुजरात से जुड़ा एक उदाहरण भी साझा किया।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों के हित में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

अखिलेश यादव का पलटवार
राज्यपाल के बयान का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और मीडिया से बातचीत में भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने “गोरखपुर मॉडल की पोल खोलते-खोलते गुजरात मॉडल की घपलेबाजी का भी खुलासा कर दिया।”

सपा प्रमुख ने कहा कि सबसे दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। ऐसे में यदि व्यवस्थाओं में खामियां हैं तो इसकी जिम्मेदारी भी भाजपा सरकार की ही बनती है।

‘डबल इंजन अब ट्रबल इंजन’
अखिलेश यादव ने भाजपा के “डबल इंजन सरकार” के नारे पर भी तंज कसते हुए कहा कि दोनों सरकारों के बीच तालमेल की बजाय टकराव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि “आपसी टकराहट की वजह से डबल इंजन अब ट्रबल इंजन बन गया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास के दावों के बावजूद शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में सफल नहीं रही है।

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राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
राज्यपाल के बयान और उस पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का अवसर बता रहा है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यपाल का उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर ध्यान दिलाना था।

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शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्थाओं, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मुद्दे को जनता के सामने रख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक आवश्यक संस्थागत सुधार और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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